हनुमान चालीसा की एक चौपाई में वर्णन है कि हनुमान जी सूर्य की ओर एक लंबी छलांग लगाते हैं और उसे मीठा फल समझकर ग्रहण कर लेते हैं।
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हनुमान चालीसा का वैज्ञानिक तथ्य
हनुमान चालीसा का एक सबसे रोचक और वैज्ञानिक दृष्टि से अद्भुत तथ्य यह है कि इसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का उल्लेख किया गया है। तुलसीदास जी ने यह चालीसा 15वीं शताब्दी में रची थी। उस समय की वैज्ञानिक समझ के हिसाब से भी यह दूरी अत्यंत सटीक बताई गई थी, जो 17वीं शताब्दी के वैज्ञानिकों द्वारा की गई गणनाओं से कहीं अधिक सही थी। हनुमान चालीसा की एक चौपाई में वर्णन है कि हनुमान जी सूर्य की ओर एक लंबी छलांग लगाते हैं और उसे मीठा फल समझकर ग्रहण कर लेते हैं। यह चौपाई है-
“जुग सहस्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू”
वैज्ञानिक और गणितीय रूप से समझें तो-
1 जुग = 12,000 वर्ष
1 सहस्र = 1,000
1 जोजन = 8 मील
तो दूरी = 12,000 × 1,000 × 8 = 96,000,000 मील
इसे किलोमीटर में बदलें तो ≈ 153,600,000 किमी
वास्तविकता में, पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 150,000,000 किलोमीटर है। इसका अर्थ है कि तुलसीदास जी ने अपनी रचना में इस दूरी को लगभग बिल्कुल सटीक रूप से बताया था। यह हनुमान चालीसा की वैज्ञानिक गहराई और अद्भुतता को दर्शाता है।