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Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव पर जानें हनुमान चालीसा और हनुमान जी के बारे में अनसुने तथ्य

Wed, 01 Apr 2026 02:09 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

कल चैत्र पूर्णिमा यानी 2 अप्रैल को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसी अवसर पर आइए जानते हैं  हनुमान चालीसा और हनुमान जी से जुड़े अनोखे तथ्यों के बारे में।
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हनुमान जन्मोत्सव 2026 - फोटो : amar ujala
Hanuman Chalisa Facts on Hanuman Janmotsav: भगवान राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति के लिए प्रसिद्ध हनुमान जी साहस और निष्ठा के साक्षात प्रतीक माने जाते हैं। तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा पूरी तरह से भगवान राम के उस निष्ठावान सेवक को समर्पित है जिसके लिए राम की भक्ति के सिवा और कुछ भी मायने नहीं रखता था। हनुमान चालीसा में 40 चौपाई हैं और यह हनुमान जी के गुणों का बखान करती है। ऐसा माना जाता है कि यह लोगों को राहत और शक्ति प्रदान करती है, ताकि वे जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना कर सकें। इसके छंद हनुमान जी के जीवन, उनकी शक्ति, भक्ति और ऐसी ही अनेक बातों के वर्णन से परिपूर्ण हैं। कल चैत्र पूर्णिमा यानी 2 अप्रैल को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसी अवसर पर आइए जानते हैं  हनुमान चालीसा और हनुमान जी से जुड़े अनोखे तथ्यों के बारे में।
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हनुमान जी के गुरु कौन है? - फोटो : Adobe
हनुमान जी के गुरु कौन है?  
हनुमान जी के गुरु के बारे में जब भी बात होती है तो सूर्यदेव को उनका गुरु कहा जाता है। यह बात आंशिक रूप से सही भी है क्योंकि सूर्य देव ने ही उन्हें शिक्षा और ज्ञान प्रदान की थी। लेकिन हनुमान चालीसा में इस बात का उल्यलेख मिलता है कि वह माता सीता को अपना गुरु मानते थे। हनुमान चालीसा की शुरुआत दो दोहों से होती है, जिसमें पहला शब्द 'श्री गुरु चरन सरोज रज' है। कई विद्वानों के अनुसार यहाँ 'श्री गुरु' का तात्पर्य माता सीता से है।
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हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और उनके भ्राता लक्ष्मण का विशेष उल्लेख किया है। - फोटो : amar ujala
हनुमान चालीसा में वर्णित चौपाइयां 
हनुमान चालीसा की पहली 10 चौपाइयां हनुमान जी की शक्ति, बुद्धि और श्रीराम भक्ति को दर्शाती हैं। 11 से 20 चौपाइयों में श्रीराम और उनके भ्राता लक्ष्मण का उल्लेख है। चालीसा के अंतिम चौपाइयों में हनुमान जी की कृपा और उनके भक्तों के लिए उनकी उपस्थिति का वर्णन किया गया है। हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और उनके भ्राता लक्ष्मण का विशेष उल्लेख किया है।

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हनुमान चालीसा की एक चौपाई में वर्णन है कि हनुमान जी सूर्य की ओर एक लंबी छलांग लगाते हैं और उसे मीठा फल समझकर ग्रहण कर लेते हैं। - फोटो : instagram
हनुमान चालीसा का वैज्ञानिक तथ्य 
हनुमान चालीसा का एक सबसे रोचक और वैज्ञानिक दृष्टि से अद्भुत तथ्य यह है कि इसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का उल्लेख किया गया है। तुलसीदास जी ने यह चालीसा 15वीं शताब्दी में रची थी। उस समय की वैज्ञानिक समझ के हिसाब से भी यह दूरी अत्यंत सटीक बताई गई थी, जो 17वीं शताब्दी के वैज्ञानिकों द्वारा की गई गणनाओं से कहीं अधिक सही थी। हनुमान चालीसा की एक चौपाई में वर्णन है कि हनुमान जी सूर्य की ओर एक लंबी छलांग लगाते हैं और उसे मीठा फल समझकर ग्रहण कर लेते हैं। यह चौपाई है-
“जुग सहस्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू”
वैज्ञानिक और गणितीय रूप से समझें तो-
1 जुग = 12,000 वर्ष
1 सहस्र = 1,000
1 जोजन = 8 मील
तो दूरी = 12,000 × 1,000 × 8 = 96,000,000 मील
इसे किलोमीटर में बदलें तो ≈ 153,600,000 किमी
वास्तविकता में, पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 150,000,000 किलोमीटर है। इसका अर्थ है कि तुलसीदास जी ने अपनी रचना में इस दूरी को लगभग बिल्कुल सटीक रूप से बताया था। यह हनुमान चालीसा की वैज्ञानिक गहराई और अद्भुतता को दर्शाता है।
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हनुमान चालीसा की रचना अवधी भाषा में की गई थी। - फोटो : adobe stock
किस भाषा में लिखी गई हनुमान चालीसा?  
हनुमान चालीसा की रचना कवि तुलसीदास ने की थी। इसे अवधी भाषा में लिखा गया। तुलसीदास जी अपने जीवन के अंतिम दिनों तक वाराणसी में रहे। उनके सम्मान में वहां एक घाट का नाम उनके नाम पर रखा गया है जिसे आज भी तुलसी घाट के नाम से जाना जाता है। 
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तुलसीदास जी ने बनारस में मौजूद संकट मोचन हनुमान मंदिर का निर्माण किया था।
हनुमान मंदिर का निर्माण 
भारत में हनुमान जी के कई मंदिर हैं लेकिन तुलसीदास जी ने बनारस में मौजूद संकट मोचन हनुमान मंदिर का निर्माण किया था। तुलसीदास जी ने ही हनुमान चालीसा की रचना की थी। कहा जाता है कि जब उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना की तो अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं श्रीराम उस समय उपस्थित थे और उन्होंने इस रचना को सुना।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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