ब्रिटेन की मैनचेस्टर स्थित दारुल उलूम मस्जिद के इमाम मोहम्मद कहते हैं, "कुछ देशों और संगठनों ने हमें ग़ैर मुसलमान घोषित किया है। ये उनकी राय है। इस वजह से ये थोड़ा पेचीदा हो जाता है।अहमदिया के लिए हज करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए जब वो हज के लिए जाते हैं तो ज़्यादा चौकन्ना रहते हैं। "इमाम मोहम्मद कहते हैं, "आम तौर पर लोग नहीं पूछते हैं कि आप किस फ़िरक़े से ताल्लुक रखते हैं। हम वहाँ किसी को परेशान नहीं करते, हम वहाँ की परिस्थितियां बदलने के लिए वहाँ नहीं जाते और किसी को नुकसान पहुँचाने का इरादा नहीं रखते। " इमाम का मानना है कि इन सबके बावजूद अहमदिया मुसलमानों को डिपोर्ट (उनके देश वापस भेजना) किया जाता है। इमाम कहते हैं, "जिस क्षण वे किसी अहमदिया मुसलमान को डिपोर्ट करने का फ़ैसला करते हैं, आप पाएंगे कि अहमदिया मुसलमान किसी तरह का विरोध नहीं करेंगे, क्योंकि हम भी देश का सम्मान करते हैं या उस देश का सम्मान करते हैं, जहाँ हम रहते हैं।"