गुरु पूर्णिमा का महत्व
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आज व्यासपूजा की जाती है, वेद व्यास जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वैदिक परम्परा के अनुसार गुरु को जीवन में और ब्रह्माण्ड में सर्वोपरि माना गया है। गुरु प्रकाश की ओर ले जाने का कारक है और मानव जीवन तथा जीवन का अभिप्राय सार्थक सिद्ध करने वाला होता है।
जब जीवन में गुरु का आगमन होता है, गुरु अपने शिष्य को नीति और अनीति, धर्म और अधर्म, अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का बोध करवाता है। जीवन में अध्यात्म का बोध होता है। गुरु अपने शिष्य को प्रारब्ध और पश्चाताप के बंधन से मुक्त करता है तथा जीवन को प्रकाश की ओर ले जाता है, कार्मिक विषयों से मोक्ष देता है। गुरु को शिव का स्वरूप माना जाता है। आज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन किया जाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
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जीवन में गुरु के आगमन से समस्त अनिष्ट का नाश होता है और मानव जीवन का भाग्योदय प्रारम्भ होता है। जीवन में बिना गुरु के किया हुआ यज्ञ, दान, तीर्थ सब व्यर्थ जाता है।
गुरु के सानिध्य में किए हुए अनुष्ठान, शुभ कार्य तथा ईश्वर की भक्ति सफल होती है। गुरु का दिया हुआ मंत्र के जाप करने से आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण करता है तथा गुरु मंत्र के प्रभाव से किसी भी अनिष्ट का प्रभाव जीवन में नहीं पड़ता है। ग्रह बाधा भी शांत होता है तथा ईश्वर की प्रसन्नता प्राप्त होती है तथा जीवन में सात्विकता प्रदान करता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
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जीवन में कोई भी यज्ञ, अनुष्ठान, मांगलिक कार्य गुरु के आज्ञा से करना चाहिए, क्योंकि गुरु वाणी से और गुरु के आदेश से समस्त दोष-विघ्न समाप्त हो जाता है और गुरु की वाणी की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं।
जिस मानव के जीवन में गुरु का सानिध्य रहता है, वह मानव जीवन धन्य हो जाता है।
आज क्या करना चाहिए?
आज अपने गुरु को, अपने इष्ट देव को ध्यान कर प्रणाम करें। गुरु के निमित्त अपने घर में एक घी का दीपक प्रज्वलित करें। माता-पिता को प्रणाम करें।
यथा संभव प्रयास करें कि आप गुरु के सानिध्य में रहें और गुरु का चरण आपके घर में पड़ते रहना चाहिए।
(विशेष: अपने गुरु के चरण वंदन और उनको आदर समर्पित करते हुए इस अवसर पर एक पौधा जरूर लगाएं।)