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Guru Purnima 2022: गुरु के बिना अधूरा है जीवन, जानिए गुरु की महिमा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र

Wed, 13 Jul 2022 08:12 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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जानिए गुरु की महिमा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र - फोटो : istock
Guru Purnima 2022 : आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। इस साल 13 जुलाई 2022, दिन बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन के बाद से आषाढ़ माह समाप्त हो जाता है और सावन का प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक पूर्णिमा पुण्य फलदायी होती है, लेकिन गुरु को समर्पित, गुरु पूर्णिमा को भारत में बेहद ही श्रद्धा-भाव से मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। व्यास जी को प्रथम गुरु की भी उपाधि दी जाती है, क्योंकि उन्होंने ही पहली बार मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था। भारतीय धर्म, साहित्य और संस्कृति में अनेक ऐसे दृष्टांत भरे पड़े हैं, जिनसे गुरु का महत्व प्रकट होता है। इसके अलावा कई शास्त्रों में श्लोकों के जरिए गुरु की महिमा और महत्व का वर्णन किया गया है। शास्त्रों में वर्णित श्लोकों के जरिए चलिए जानते हैं गुरु की महिमा के बारे में...  
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जानिए गुरु की महिमा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र - फोटो : amar ujala
शास्त्रों में वर्णित गुरु की महिमा
गुरु की महत्ता की बात आती है तो संत कबीर दास जी के दोहे का जिक्र सबसे पहले किया जाता है-

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।

अर्थात- गुरू और गोविन्द (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए – गुरू को अथवा गोविन्द को? ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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जानिए गुरु की महिमा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र - फोटो : Instagram
तुलसीदास ने भी गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना है, उन्होंने रामचरितमानस में लिखा है-

गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई।
जों बिरंचि संकर सम होई।।

अर्थात- भले ही कोई ब्रह्मा, शंकर के समान क्यों न हो, वह गुरु के बिना भव सागर पार नहीं कर सकता।

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जानिए गुरु की महिमा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र - फोटो : Instagram
प्राचीन शास्त्र गुरुगीता में गुरु महिमा का वर्णन इस प्रकार मिलता है

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।

अर्थात- गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।
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जानिए गुरु की महिमा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र - फोटो : Instagram
संत तुलसीदास जी गुरू को मनुष्य रूप में नारायण यानी भगवान ही मानते हैं। वे रामचरितमानस में लिखते हैं-

बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।

अर्थात्- गुरु मनुष्य रूप में नारायण ही हैं। मैं उनके चरण कमलों की वन्दना करता हूँ। जैसे सूर्य के निकलने पर अन्धेरा नष्ट हो जाता है, वैसे ही उनके वचनों से मोहरूपी अन्धकार का नाश हो जाता है।
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जानिए गुरु की महिमा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र - फोटो : Instagram
वहीं महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में कहा गया है कि-

स्वर्गो धनं वा धान्यं वा विद्या पुत्राः सुखानि च ।
गुरु वृत्युनुरोधेन न किंचितदपि दुर्लभम् ।।

अर्थात- गुरुजनों की सेवा करने से स्वर्ग, धन-धान्य, विद्या, पुत्र, सुख आदि कुछ भी दुर्लभ नहीं है।
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