गुरु अस्त के दौरान किन कार्यों से बचें
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गुरु अस्त के दौरान किन कार्यों से बचें
वैदिक ज्योतिष में गुरु को शुभता, धर्म, ज्ञान, विवाह और संतान का कारक ग्रह माना जाता है। जब गुरु अस्त होते हैं, तब उनकी शुभता कमजोर हो जाती है, इसलिए इस समय मांगलिक कार्यों को टालना उचित माना जाता है।
विवाह से परहेज करें- गुरु विवाह के प्रमुख कारक ग्रह हैं, इसलिए उनके अस्त रहने पर विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं निकाले जाते। इस दौरान विवाह करने से वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।
धार्मिक अनुष्ठान टालें- मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा, यज्ञ, कलश स्थापना और अन्य बड़े धार्मिक कार्यों के लिए गुरु का शुभ होना जरूरी होता है। इसलिए इस अवधि में ऐसे कार्यों को स्थगित किया जाता है।
गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य न करें- नए घर में प्रवेश, मुंडन, उपनयन, नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्य भी इस समय नहीं किए जाते। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।