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गोवर्धन पूजा 2026: 9 या 10 नवंबर, कब मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा? जानें सही तारीख और पौराणिक कथा

Fri, 09 Oct 2026 09:54 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

गोवर्धन पूजा 2026: दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर इस बार असमंजस है। कोई 9 नवंबर तो कोई 10 नवंबर बता रहा है। आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा की सही तारीख और भगवान कृष्ण से जुड़ी इसकी पौराणिक कथा।
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govardhan puja - फोटो : amar ujala

Govardhan Puja 2026: हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत, प्रकृति और गौ सेवा से जुड़ा हुआ है। दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला इस पर्व को कई जगहों पर अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को तरह-तरह के सात्विक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा करने और उसकी परिक्रमा करने की परंपरा है। आइए जानते हैं साल 2026 में गोवर्धन पूजा कब होगी, पूजा का शुभ समय क्या है, इसकी पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व क्या है।

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govardhan puja - फोटो : freepik

गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
साल 2026 में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। दिल्ली के अनुसार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2:00 बजे समाप्त होगी। गोवर्धन पूजा का दिन तय करते समय स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार तिथि और पूजा के समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

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govardhan puja - फोटो : freepik

गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
दिल्ली के समय के अनुसार 10 नवंबर 2026 को गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन जी की पूजा कर सकते हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त में कुछ बदलाव संभव है।

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गोवर्धन पर्वत - फोटो : Instagram

क्यों मनाई जाती है गोवर्धन पूजा?
गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला की स्मृति में मनाई जाती है, जिसमें उन्होंने ब्रजवासियों को इंद्र देव की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश दिया था। धार्मिक मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत ब्रजवासियों और उनके पशुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। श्रीकृष्ण ने लोगों को प्रकृति, पर्वत, गौवंश और अन्न के महत्व को समझाया। इसी परंपरा से गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व जुड़ा माना जाता है।

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गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा - फोटो : अमर उजाला

गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रजवासी अच्छी वर्षा और समृद्धि के लिए इंद्र देव की पूजा किया करते थे। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि उनके जीवन में गोवर्धन पर्वत, जंगल, खेत और गौवंश का भी बहुत बड़ा योगदान है। इसलिए उन्हें प्रकृति और गोवर्धन पर्वत के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए। ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण की बात मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की और तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया। यह देखकर इंद्र देव क्रोधित हो गए और ब्रज में तेज बारिश होने लगी।लगातार वर्षा से ब्रजवासियों को परेशानी होने लगी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। सभी ब्रजवासी और उनके पशु पर्वत के नीचे आकर सुरक्षित हो गए। कई दिनों तक श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को धारण किए रखा। अंत में इंद्र देव को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने अपना अहंकार त्याग दिया। गोवर्धन पूजा की यह कथा प्रकृति के महत्व, सामूहिक सहयोग और अहंकार से दूर रहने का संदेश देती है।

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गोवर्धन पूजा की पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला

गोवर्धन पूजा की पूजा विधि

  • गोवर्धन पूजा घर पर भी श्रद्धा के साथ की जा सकती है। इसके लिए सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके गोवर्धन जी की आकृति बनाई जाती है।
  • कई घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाने की परंपरा है। इसे फूलों, पत्तियों और अन्य पूजा सामग्री से सजाया जाता है।
  • इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके दीप जलाया जाता है। रोली, अक्षत, फूल, धूप और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
  • भगवान को विभिन्न सात्विक पकवानों का भोग लगाया जाता है।
  • पूजा के बाद गोवर्धन जी की परिक्रमा और भगवान श्रीकृष्ण की आरती की जाती है। अंत में प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

 

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अन्नकूट पूजा क्या है और इसका महत्व क्या है? - फोटो : Instagram
अन्नकूट पूजा क्या है और इसका महत्व क्या है?
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है। अन्नकूट का अर्थ है विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का विशेष समूह। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के लिए कई तरह के शाकाहारी व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इन पकवानों को श्रद्धा से भगवान को अर्पित किया जाता है। कई वैष्णव परंपराओं में इस अवसर पर छप्पन भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। अन्नकूट की परंपरा अन्न के महत्व और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करती है। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

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गौ सेवा का महत्व - फोटो : Adobe Stock

गोवर्धन पूजा में गौ सेवा का महत्व
गोवर्धन पूजा का संबंध केवल गोवर्धन पर्वत से ही नहीं, बल्कि गौवंश से भी माना जाता है। कई क्षेत्रों में इस दिन गौ पूजा करने की परंपरा है। इस अवसर पर गायों को स्नान कराकर सजाया जाता है और उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। उन्हें भोजन और गुड़ आदि खिलाने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। धार्मिक दृष्टि से गौ सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना और सामर्थ्य के अनुसार सेवा करना भी शुभ माना जाता है।

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घर में सात्विक भोजन तैयार करके भगवान को भोग लगाएं। - फोटो : अमर उजाला

गोवर्धन पूजा 2026 पर क्या करें?

  • गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • घर में सात्विक भोजन तैयार करके भगवान को भोग लगाएं।
  • सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और गौ सेवा करें।
  • साथ ही प्रकृति और पर्यावरण की स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लें।
  • गोवर्धन पूजा की कथा हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामूहिक सहयोग और विनम्रता जीवन में महत्वपूर्ण हैं।
  • इसलिए इस पर्व को केवल पूजा तक सीमित न रखकर इसके मूल संदेश को भी अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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