शास्त्रों में बसंत पंचमी को मदनोत्सव भी कहा गया है। कारण यह है कि कामदेव का एक नाम मदन भी है। मदन के आगमन से पूरी प्रकृति सुंगंध और आनंद से झूम उठती है। कामदेव के आगमन से हृदय में रंग, रोमांच और प्रेम उमड़ने लगता है। ऐसे में मनुष्य के कदम संयमित रहे इसलिए मदनोत्सव के दिन देवी सरस्वती की भी पूजा होती है।
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कामदेव के अस्त्र शस्त्र जिनसे वह स्त्री पुरुष के मन में प्रेम जगाते हैं
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शास्त्रों में कथा मिलती है कि भगवान शिव ने जब कामदेव का भष्म कर दिया तो कामदेव ने अपना शरीर पाने के लिए काफी प्रयास किया। उस समय भगवान शिव ने कामदेव को स्त्री पुरुषों के अंगों के अलावा कई अन्य वस्तुओं पर वास करने का अधिकार प्रदान किया। यह स्थान इस प्रकार हैं। यौवनं स्त्री च पुष्पाणि सुवासानि महामते:। गानं मधुरश्चैव मृदुलाण्डजशब्दक:।। उद्यानानि वसन्तश्च सुवासाश्चन्दनादय:। सङ्गो विषयसक्तानां नराणां गुह्यदर्शनम्। वायुर्मद: सुवासश्र्च वस्त्राण्यपि नवानि वै। भूषणादिकमेवं ते देहा नाना कृता मया।। अब इन श्लोकों का मतलब भा जान लीजिए।
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कामदेव के अस्त्र शस्त्र जिनसे वह स्त्री पुरुष के मन में प्रेम जगाते हैं
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यहां बताया गया है कि कामदेव का निवास यौवन, स्त्री, सुंदर फूल, गीत, परागकण, पक्षियों के स्वर, सुंदर बाग-बगीचा, बसंत ऋतु, चंदन, काम वासना, मन्द हवा, सुन्दर घर, आकर्षक वस्त्र और आभूषण धारण किए अंगों पर है। इनके अलावा कामदेव स्त्रियों के शरीर में वास करते हैं। खासतौर पर स्त्रियों के नयन, भौंह, ललाट और होठों पर इनका प्रभाव रहता है। व्यक्ति को प्रेम वाण से घायल करने के लिए कामदेव इन अस्त्रों का भी प्रयोग करते हैं।
कामदेव के अस्त्र शस्त्र जिनसे वह स्त्री पुरुष के मन में प्रेम जगाते हैं
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इनके अलावा शास्त्रों में कामदेव के अस्त्र शस्त्र के रुप में धनुष बाण का जिक्र किया है। कामदेव का धनुष गन्ने का है जिसके तीन कोण हैं जो तीनों लोक, तीनों देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक माने जाते हैं। यानी यह धनुष इस बात को दर्शाता है कि मनुष्य के लिए सृष्टि का विकास यानी काम जितना आवश्यक है उतना ही कर्म और मोक्ष की प्राप्ति भी जरुरी है।
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कामदेव के अस्त्र शस्त्र जिनसे वह स्त्री पुरुष के मन में प्रेम जगाते हैं
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कामदेव के पास व्यक्ति के मन में प्रेम जगाने के लिए पांच पुष्पवाण हैं। यानी कामदेव के धनुषवाण ऐसे हैं जिनसे घायल होने के बाद भी व्यक्ति आनंद और मिठास महसूस करता है। कामदेव धनुषबाण की खूबी यह भी है कि इनके चलने से कोई स्वर नहीं होता है और सीधा हृदय से प्रेम की टीस उठती है।
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कामदेव के सहायक के रूप में बसंत ऋतु और उनकी पत्नी रति का नाम आता है। देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव का ध्यान भंग करने के लिए इन दोनों ने भी कामदेव की सहायता की थी।