गरुड़ पुराण
- फोटो : Social media
तीसरे महीने में शिशु के नाखून, रोम, लिंग, त्वचा, हड्डी और दस द्वार के छिद्र बनते हैं। चौथे महीने में शिशु के मांस, रुधिर, तव्चा, मज्जा और अस्थि तैयार होती है। पांचवे महीने में तृषा और क्षुधा बनती है। छठे महीने में शिशु गर्भ के भीतर हिलने लगता है। मां द्वारा मिल रहे आहार को पाकर शिशु तेजी से विकसित होता है।