धरती पर देवी गंगा के आगमन की तिथि के बारे में ब्रह्म पुराण में बताया गया है कि 'ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता। हरते दशा पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता।। यानि ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन हस्त नक्षत्र में गंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ। गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान से दश पापों से मुक्ति मिलती है। इस वर्ष गंगा दशहरा 14 जून को है। 15 जून को भी दशमी तिथि होने से गंगा दशहरा में स्नान दान का पुण्य इस वर्ष दो दिनों तक प्राप्त होगा। गंगा दशहरा के अवसर पर जानिए आखिर गंगा तट पर मृत्यु और गंगा में अस्थि वसर्जन के बारे में क्या कहते हैं पुराण।
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इसलिए गंगा में अस्थि वसर्जन के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग
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गंगा
- फोटो : अमर उजाला
गंगा तट पर देह त्याग करने वाले को यमदंड का सामना नहीं करना पड़ता है। महाभागवत में यमराज ने अपने दूतों से कहा है कि गंगा में देह त्याग करने वाले प्राणियों की आज्ञा के मैं स्वयं अधीन हूं। वे लोग इन्द्रादि देवताओं के लिए भी नमस्कार योग्य हैं तो फिर मेरे द्वारा उन्हें दंडित करने की बात ही कहां आती है। यही वजह है कि अंतिम समय में लोग गंगा तट पर निवास करना चाहते हैं।
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इसलिए गंगा में अस्थि वसर्जन के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग
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गंगा
पद्मपुराण में जिक्र आया है कि बिना इच्छा के भी यदि किसी व्यक्ति का गंगा जी में निधन हो जाए तो ऐसा व्यक्ति सभी पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु को प्राप्त होता है।
इसलिए गंगा में अस्थि वसर्जन के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग
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गंगा
गंगा में अस्थि विसर्जन के पीछे महाभारत की एक मान्यता है कि जितने समय तक गंगा में व्यक्ति की अस्थि पड़ी रहती है व्यक्ति उतने समय तक स्वर्ग में वास करता है।
इसलिए गंगा में अस्थि वसर्जन के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग
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गंगा
पद्मपुराण में जिक्र किया गया है कि मृत्यु के समय मुंह में गंगा जल की एक बूंद भी मुंह में पड़ जाए या गंगा का नाम व्यक्ति स्मरण कर ले तो वह पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक में जाता है।