गंगा दशहरा
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राजा सगर के पुत्रों का अंत
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा सगर के साठ हजार पुत्रों ने महर्षि कपिल मुनि का अपमान कर दिया था। इससे क्रोधित होकर मुनि ने उन्हें अपनी तपस्या की अग्नि से भस्म कर दिया। इस कारण सभी पुत्र असामयिक मृत्यु को प्राप्त हुए और बिना अंतिम संस्कार के उनकी आत्माएं मोक्ष के बिना भटकने लगीं।
भगीरथ का संकल्प
राजा सगर के वंश में बाद में भगीरथ का जन्म हुआ। जब उन्हें अपने पूर्वजों की दुर्दशा का पता चला, तो उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वर्ग से मां गंगा को पृथ्वी पर लाकर अपने पूर्वजों का उद्धार करेंगे। उन्होंने कठोर तपस्या की और भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया।
मां गंगा का धरती पर आगमन
भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने का वरदान दिया। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं। जब उनकी पवित्र धारा राजा सगर के पुत्रों की अस्थियों से टकराई, तो सभी आत्माओं को मोक्ष प्राप्त हुआ। इसी दिव्य घटना की स्मृति में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है और माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान से सभी पापों का नाश होता है।
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