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गणेश विसर्जन 2026: गणपति विसर्जन पर पंचक का साया, इन नियमों का रखें ध्यान

Thu, 24 Sep 2026 12:21 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Ganesh Visarjan 2026: अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया जाएगा, लेकिन इस बार पंचक का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में जानें पंचक कब से कब तक रहेगा और विसर्जन के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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पंचक के दौरान गणेश विसर्जन - फोटो : amar ujala

गणेश उत्सव अब समापन की ओर है। 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी। इस बार गणेश विसर्जन के समय पंचक भी रहेगा। ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पंचक के दौरान गणेश जी का विसर्जन किया जा सकता है और इस अवधि में किन कार्यों को करने से बचना चाहिए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सितंबर का पंचक 23 सितंबर 2026 की रात से शुरू हुआ है और 28 सितंबर की सुबह तक रहेगा। ऐसे में 25 सितंबर को होने वाला गणेश विसर्जन पंचक की अवधि में ही किया जाएगा।

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Panchak In September 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

पंचक क्या होता है?
ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है, तब इस अवधि को पंचक कहा जाता है। यह अवधि सामान्य तौर पर करीब पांच दिनों की होती है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, सभी धार्मिक कार्यों पर पंचक का निषेध लागू नहीं माना जाता।

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सितंबर 2026 में पंचक कब से कब तक रहेगा? - फोटो : freepik

सितंबर 2026 में पंचक कब से कब तक रहेगा?
सितंबर 2026 में पंचक की शुरुआत 23 सितंबर की रात 9 बजकर 57 मिनट से हुई है। पंचांग के अनुसार पंचक 28 सितंबर की सुबह करीब 10 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस दौरान चंद्रमा पहले कुंभ राशि और उसके बाद मीन राशि में रहेगा। इसी वजह से 25 सितंबर को पड़ने वाली अनंत चतुर्दशी पंचक की अवधि में आएगी।

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पंचक के दौरान पड़ रहे हैं ये खास अवसर

पंचक के दौरान पड़ रहे हैं ये खास अवसर
इस बार पंचक की अवधि में कई महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर भी पड़ रहे हैं। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसी दिन गणपति बप्पा के विसर्जन के साथ गणेश उत्सव का समापन होगा। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की भी परंपरा है। इसके अगले दिन यानी 26 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। ऐसे में सितंबर के आखिरी दिनों में लगातार कई धार्मिक पर्व और अनुष्ठान पड़ रहे हैं।

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गणपति विसर्जन 2025 - फोटो : Adobe

क्या पंचक में कर सकते हैं गणेश विसर्जन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने पर सामान्य तौर पर कोई रोक नहीं मानी जाती है। इसलिए इस अवधि में भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जा सकती है और बप्पा के विसर्जन की तैयारी भी की जा सकती है। पंचक में मुख्य रूप से लकड़ी से जुड़े कुछ कार्य, चारपाई बनाना और छत डालने जैसे कामों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की मान्यता है। ऐसे में गणेश विसर्जन को लेकर केवल पंचक होने के कारण पूजा रोकने की आवश्यकता नहीं मानी जाती।

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पंचक के दौरान किन कामों से बचें? - फोटो : freepik

पंचक के दौरान किन कामों से बचें?

  • पंचक को लेकर धार्मिक परंपराओं में कुछ कार्यों को टालने की मान्यता है।
  • इस अवधि में विशेष रूप से लकड़ी या लकड़ी से बनी वस्तुओं की खरीदारी करने से बचने की सलाह दी जाती है।
  • इसी तरह पलंग या बिस्तर खरीदना भी पंचक के दौरान शुभ नहीं माना जाता।
  • नए घर का निर्माण शुरू करना, मकान की छत डलवाना या पहली चौखट लगाना जैसे कार्यों को भी पंचक समाप्त होने के बाद करने की परंपरा है।
  • इसके अलावा पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचने की मान्यता भी प्रचलित है।
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पंचक में श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं? - फोटो : freepik

पंचक में श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं?
26 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ सकता है कि पंचक के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जा सकता है या नहीं। धार्मिक परंपराओं में पितृ पक्ष के श्राद्ध और तर्पण को विशेष धार्मिक कर्म माना गया है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन कर्मों को किया जा सकता है। किसी विशेष स्थिति में स्थानीय पंडित या विद्वान से मुहूर्त और विधि की जानकारी लेना उचित रहेगा।

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बप्पा को श्रद्धा से दें विदाई

बप्पा को श्रद्धा से दें विदाई
इस बार गणेश विसर्जन और पंचक का संयोग जरूर बन रहा है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के कारण गणपति विसर्जन रोकने की आवश्यकता नहीं है। भक्त 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर विधि-विधान से पूजा करके गणपति बप्पा को विदाई दे सकते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है

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