महाभारत का महायुद्ध भले ही एक परिवार का युद्ध था लेकिन इस महायुद्ध में करोड़ों योद्धा शामिल हुए और मृत्यु को प्राप्त हुए। यह युद्ध क्यों हुआ और कौन इसका जिम्मेदार है इस बात पर अक्सर चिंतन चलता रहा है। महाभारत की घटनाओं पर गौर करेंगे तो आपको हर पात्र कहीं न कहीं युद्ध के लिए जिम्मेदार दिखेगा लेकिन सबसे बड़ा जिम्मेदार दुर्योधन को माना जाता है इसलिए महाभारत का खलनायक भी इन्हें ही कहा जाता है और सबसे बड़ी बात की इन्हें खलनायक बनाने में इनकी माता गांधारी की भूमिका भी खूब रही थी।
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गांधारी की इन गलतियों का परिणाम महाभारत
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महाभारत
गंधार की राजकुमारी गांधारी ने महाभारत युद्ध की नींव उस समय डाली जब नेत्रहीन धृतराष्ट्र से विवाह करने लिए अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और जीवन भर पट्टी नहीं खोलने की प्रतिज्ञा ली।
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कर्ण दुर्योधन महाभारत
गांधारी की प्रतिज्ञा का परिणाम यह हुआ कि इनका बड़ा पुत्र दुर्योधन जिसे इन्होंने सबसे ज्यादा महत्व दिया दृष्टिहीन माता-पिता को पाकर गलत राह पर चल पड़ा और इसमें मार्ग दर्शक बने मामा शकुनी।
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द्रौपदी वस्त्रहरण
गांधारी की आंखों पर लगी पट्टी दुर्योधन की गलतियों के लिए हमेशा पर्दा डालने के काम आया। गांधारी दृष्टिहीन बनकर बैठी थी और धृतराष्ट्र नेत्रहीन थे। इस बात का लाभ उठाकर दुर्योधन ने द्रौपदी को निर्वस्त्र करने का प्रयास किया। गांधारी चाहती तो इस घटना को रोक सकती थी लेकिन मर्यादा के हरण पर भी इन्होंने आंखों से पट्टी हटाने का प्रयास नहीं किया।
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गांधारी की इन गलतियों का परिणाम महाभारत
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महाभारत गीता उपदेश
दुर्योधन के पाप और गलतियों को जानते हुए भी गांधारी ने उस समय आंखों से पट्टी हटायी जब कौरव सेना के सारे बड़े योद्धा मृत्यु को प्राप्त हो गए कौरवों में भी सिर्फ दुर्योधन जीवित बचे थे। पुत्र मोह में आकर गांधारी ने अपने पूरे जीवन की तपस्या का फल दुर्योधन को देने का निर्णय लिया और दुर्योधन के शरीर को बज्र का बनाने के लिए आंखों से पट्टी हटायी।
अगर गांधारी द्रौपदी वस्त्र हरण के समय आंखों से पट्टी हटा लेती तो महाभारत का महायु्द्ध शायद टल सकता था और गांधारी के 100 पुत्र मृत्यु को प्राप्त नहीं हुए होते।