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Falgun Amavasya 2021: इस दिन है फाल्गुन मास की अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और नियम

Mon, 08 Mar 2021 10:16 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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फल्गुन अमावस्या 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : प्रयागराज
हिंदी पंचांग के अनुसार हर माह में कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहा जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 13 मार्च को पड़ रही है। जिस तरह से पूर्णिमा तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है, उसी प्रकार धार्मिक दृष्टि से अमावस्या तिथि को भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। अमावस्या तिथि को पितरों का तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन दान और स्नान का बहुत महत्व माना गया है। तो चलिए जानते हैं फाल्गुन मास की अमावस्या का महत्व, शुभ मुहूर्त और नियम..
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फल्गुन अमावस्या 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : प्रयागराज
फाल्गुन अमावस्या का शुभ मुहूर्त
 
फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि यानि अमावस्या 13 मार्च 2021 दिन शनिवार को पड़ रही है।
 
अमावस्या तिथि आरंभ- 12 मार्च 2021 दिन शुक्रवार दोपहर 03 बजकर 04 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त- 13 मार्च दिन शनिवार दोपहर 03 बजकर 52 मिनट पर
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फाल्गुन अमावस्या 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : प्रयागराज
फाल्गुन अमावस्या का महत्व
फाल्गुन मास की अमावस्या के दिन व्रत, पूजन और तर्पण करने से करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कालसर्प दोष निवारण के लिए भी यह दिन बहुत उत्तम रहता है। इस दिन कालसर्प का निवारण करवाने के बाद चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए। माना जाता है कि इससे कालसर्प का निवारण होता है। इस दिन पितरों का श्राद्ध कर्म करने के साथ उनके नाम से दान आदि करने से उनका आशीर्वाद बना रहता है, जिससे आपके जीवन की समस्याएं दूर होती हैं। परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
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फल्गुन अमावस्या 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
अमावस्या तिथि पर क्या करें
  • फाल्गुन अमावस्या को प्रातः जल्दी उठकर किसी नदी या पवित्र सरोवर में स्नान करें।
  • स्नान करने के पश्चात सूर्य को जल दें. तत्पश्चात अपने पितरों को भी जल दें।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प करें।
  • यदि पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना चाहते हैं तो वह अनुष्ठान भी संपन्न करें।
  • जरूरतमंदो और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
  • इस दिन दान का विशेष महत्व है अपने पितरों को नाम से अनाज, वस्त्र, तिल, आंवला, कंबल, पलंग, घी आदि का दान करें। 
  • किसी गौशाला में गाय के लिए हरा चारा या फिर चारें के लिए धन का दान करें।
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