भारतीय संस्कृति में मंदिरों का और देवी-देवताओं को अधिक महत्व है। अपने भगवान को खुश करने के लिए भक्त उन्हें तरह तरह भी चीजें अर्पित करते हैं। कभी उनका पसंदीदा भोग तो कभी धन, लेकिन केरल में एक ऐसा भी मंदिर है, जहां भक्त हाथी दान करते हैं। इस मंदिर में हाथी अभ्यारण ही बन गया है। वैसे इस मंदिर में आपको दर्शन के लिए यहां का निर्धारित खास ड्रेस कोड पहनना पड़ेगा। नहीं तो आप इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। यह खास मंदिर है केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवायुर मंदिर, यहां भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप भगवान गुरुवायुरप्पन की पूजा होती है।
यह भी पढ़ें- इस मंदिर में पुरुषों का प्रवेश है निषेध, जानें कैसे कर पाते हैं पूजा
विज्ञापन
2 of 8
केरल का यह सबसे महत्वपूर्ण मंदिर कई शतब्दियों पुराना है। माना जाता है कि इस युग के प्रारम्भ में बृहस्पति को भगवान कृष्ण की मूर्ति तैरती हुई थी। जिसके उन्होंने और वायु देवता ने इस युग के मानवों की सहायता के लिए इस मंदिर में स्थापित की। यह भी कहा जाता है कि गुरुवायुर में जो मूर्ति है, उसे द्वापर युग में भगवान कृष्ण द्वारा प्रयोग की गई थी।
विज्ञापन
3 of 8
मंदिर के पास एक गज अभयारणय है, जिसे पुन्नाथुर कोट्टा कहते है। इस अभयारण्य में करीब 60 हाथी है। खास बात यह है यहां के सभी हाथी भक्तों द्वारा दान किया गए हैं। इन हाथियों को मंदिर के कामों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इनमें से एक अग्रवी हाथी का नाम गुरुवायुर केसवन है, जिसे मंदिर के पौराणिक साहित्य में स्थान दिया गया है।
यह भी पढ़ें- सदियों से आखिर क्यों है ये मंदिर अधूरें, कारण कर देंगे हैरान
4 of 8
इस मंदिर में आने से यहां के ड्रेस कोड का ध्यान रखना जरूरी होता है। यहां आने वाले सभी भक्तों के लिए एक ड्रेस कोड निर्धारित है। आदमियों के लिए मंडु (एक तरह की धोती) पहनना जरूरी होता है, लेकिन इसके ऊपर वो किसी भी प्रकार कि शर्ट, टीशर्ट जैसा कुछ भी नहीं पहन सकते है, लेकिन चेस्ट का ढ़कने के लिए वेश्थी (कपड़े का एक छोटा सा टुकड़ा) डाल सकते हैं। लड़को को शॉर्ट्स पहनना जरूरी होता है, लेकिन उसके ऊपर शर्ट पहनना निषेध है। वहीं महिलाओं और लड़कियों को जीन्स, ट्राउजर जैसा कुछ भी पहनना निषेध है। महिलाओं को साड़ी और लड़कियों को लॉन्ग स्कर्ट के साथ ब्लाउज पहनना जरूरी होता है। हालांकि वर्तमान में महिलाओं को सलवार कमीज पहनने पर भी छूट दे दी गई है।
विज्ञापन
5 of 8
मंदिर में पूजा की दिनचर्या का काफी सख्ती से पालन किया जाता है। मुख्य पंडित सुबह तीन बजे के करीब मंदिर में आते है और दोपहर 12 बजकर 30 मिनट की पूजा होने तक वो कुछ भी खाते पीते नहीं हैं।
यह भी पढ़ें- इस जगह भगवान हनुमान की पूजा करने से कतराते हैं लोग, जानें इसके पीछे की बड़ी वजह
विज्ञापन
6 of 8
यह मंदिर केरल में हिन्दु विवाहों का अहम स्थान भी है। यहां पर अत्यधिक संख्या में विवाह होते है। कभी कभी तो इस मंदिर में एक दिन में 100 से भी ज्यादा विवाह हो जाते है। इसके पीछे भक्तों को मानना है कि भगवान के सामने वैवाहिक जीवन शुरू करना बहुत शुभ होता है। इसी मंदिर में 2013 में पूर्व भारतीय क्रिकेटर श्रीसंत ने जयपुर की राजकुमारी भुवनेश्वरी से विवाह किया था।
विज्ञापन
7 of 8
विश्व स्तर पर प्रसिद्घ नाट्य नृत्य कथकली का गुरुयावूर में काफी प्रचलन है, क्योंकि मंदिर प्रशासन गुरुयावूर देवास्वोम एक कृष्णट्टम संस्थान का संचालन करता है।
यह भी पढ़ें- भारत का है यह आखिरी गांव, यहां आने मात्र से ही सुधर जाती है आर्थिक स्थिति
गुरुयावूर मंदिर दो प्रसिद्घ साहित्यिक कृतियों के लिए भी जाना जाता है। पहली कृति मेल्पथूर नारायण भट्टाथिरी की नारायणीयम और दूसरी कृति पून्थानम के ज्नानाप्पना। दोनों ही लेखक गुरुवायुरप्पन के परम भक्त थे।