एकादशी के व्रत में क्या खा या पी सकते हैं?
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5. फलाहार: इसका अर्थ है फलों का आहार के रूप में लेना। इसमें भी खास फलों का ही चयन किया जाता है। जैसे केला, पपीता, सेवफल, अंगूर, मौसंबी, संतरा आदि। फलाहार में सूखे मेवे भी ले सकते हैं, जैसे बादाम, पिस्ता और अखरोट आदि।
6. नक्तभोजी: नक्त का अर्थ रात और भोजी का अर्थ भोजन करने वाला। अर्थात केवल रात में भोजन करने वाला। इस नियम में सूर्यास्त के बाद भोजन कर सकते हैं। कुछ लोग एक समय फलाहार और रात में भोजन कर लेते हैं। हालांकि रात्रि के भोजन में भी उपवास की वस्तुओं का ही सेवन करते हैं। जैसे साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़ा, शकरकंदी, आलू, मूंगफली के दाने, कुट्टू का आटा एवं सामक चावल आदि।
ऐसे व्रत और उपवास होते हैं जिनमें व्यक्ति दिन भर निराहार (बिना भोजन के) रहता है और केवल रात में (सूर्यास्त के बाद) एक बार भोजन करता है। ऐसे व्रत को 'नक्त व्रत' और उसे करने वाले को 'नक्तभोजी' कहा जाता है।