ईद-ए मिलाद उन नबी
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मुसलमान ईद-ए मिलाद उन नबी क्यों मनाते हैं?
12 रबी-उल-अव्वल, जिसे 12 वफ़ात भी कहा जाता है, पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जन्मदिन और उनकी मौत दोनों की याद में मनाया जाता है। “वफ़ात” का मतलब होता है मृत्यु, इसलिए कुछ लोग इस दिन को पैगंबर साहब की मौत की याद में मनाते हैं, जबकि कई लोग इसे उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं, जिसे ईद-ए मिलाद उन नबी कहा जाता है।
पैगंबर मुहम्मद साहब का जन्म और इंतकाल (मृत्यु) दोनों ही इसी तारीख को इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार आते हैं। मक्का में पैगंबर का जन्म हुआ था और मान्यताओं के अनुसार, उनकी मौत भी इसी दिन हुई थी। इसलिए इसे “बारह वफ़ात” कहा जाता है ‘बारह’ तारीख और ‘वफ़ात’ यानी इंतकाल। सुन्नी मुसलमान 12 रबी-उल-अव्वल को ईद-ए मिलाद उन नबी मनाते हैं, जबकि शिया मुसलमान इसे 17 रबी-उल-अव्वल को मनाते हैं।