एक हिस्सा कुर्बानी करने वाला अपने परिवार के लिए रखता है।
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तीन हिस्सों में क्यों बांटा जाता है कुर्बानी का गोश्त?
इस्लाम धर्म में कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की परंपरा मानी जाती है। एक हिस्सा कुर्बानी करने वाला अपने परिवार के लिए रखता है। दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को दिया जाता है। वहीं तीसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है ताकि वे भी बकरीद की खुशियों में शामिल हो सकें। इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य इंसानियत, बराबरी और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देना है। हालांकि इस्लाम में यह भी मान्यता है कि यदि जरूरतमंद लोग न हों तो व्यक्ति पूरा गोश्त अपने पास रख सकता है। वहीं अगर कोई चाहे तो पूरा गोश्त जरूरतमंदों में भी बांट सकता है।