शमी वृक्ष
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जब शमी वृक्ष के द्वारा करवाई गई स्वर्ण वर्षा
विजयादशमी के दिन शमी पूजन से धन-धान्य में बढ़ोत्तरी होती है। इस कथन के पीछे मिलने वाली कथा के मुताबिक, कौत्स, महर्षि वर्तन्तु के शिष्य थे। जब उनकी शिक्षा पूर्ण हुई तो गुरु दक्षिणा में महर्षि ने 14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं मांगी। इसके बाद कौत्स सहायता मांगने महाराज रघु के पास गए लेकिन महाराज रघु ने अपने यहां महायज्ञ कराया था और वह इतनी मुद्राओं को देने में सक्षम नहीं थे ऐसे में उन्हें विचार आया कि यदि स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया जाए तो उनका खजाना भर सकता है। इस बात का भान होते ही भगवान इंद्र घबरा गए और कोषाध्यक्ष को आदेश दिया कि रघु के राज्य में स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा की जाए। कहा जाता है कि कुबेर ने राजा रघु के यहां शमी वृक्ष के माध्यम से स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करवाई थी और यह अश्विन मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का दिन था।