विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है । इस दिन भगवान राम ने रावण को युद्ध में हराकर उसका वध किया था और लंका पर विजय प्राप्त की थी, इसी कारण से इस दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। दशहरे के दिन पूरे देश में भगवान राम की पूजा की जाती है और प्रतीक के रूप में रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन देश में ऐसी कई जगह है जहां पर दशहरे के दिन राम की नहीं बल्कि रावण की पूजा होती है। आइए जानते हैं आखिर क्यों की जाती है इन स्थानों पर रावण की पूजा ?
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दशहरा 2017
मंदसौर
मध्यप्रदेश के मंदसौर स्थान पर रावण की पूजा की जाती है। मंदसौर का पुराना नाम दशपुर था यहां की रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था इसलिए इस स्थान नाम मंदसौर पड़ा। मंदसौर रावण का ससुराल होने के कारण रावण का यहां दहन नहीं किया जाता बल्कि पूजा की जाती है।
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दशहरा
बिसरख, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के बिसरख नामक गांव में रावण की पूजा की जाती है। यह गांव रावण का ननिहाल माना जाता है। रावण के पिता विश्वेशरा के कारण इसका नाम बिसरख पड़ा।
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दशहरा
जसवंतनगर, उत्तर प्रदेश
प्रदेश के जसवंतनगर में दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। उसके बाद रावण के टुकड़े कर दिए जाते हैं और तेरहवें दिन रावण की तेरहवीं भी की जाती है।
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दशहरा 2017
अमरावती,महाराष्ट्र
अमरावती के गढ़चिरौली में यहां के आदिवासी लोग दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। ये आदिवासी समुदाय रावण को अपना देवता मानते हैं।
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रावण की पूजा की जाती है। दरअसल रावण ने यहां पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी और उसे भगवान भोलेनाथ ने मोक्ष का वरदान दिया था। इसी कारण से यहां के लोग रावण का पुतला नहीं जलाते है।