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शनि अमावस्या के दिन करें इन 5 उपायों में से कोई एक, दूर होंगे शनिदोष

Sat, 18 Nov 2017 08:14 AM IST
amarujala.com- Presented By: विनोद शुक्ला
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18 नवंबर को शनि अमावस्या है। शास्त्रों के अनुसार जो अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है उसका विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि शनिवार और अमावस्या का बहुत ही दुर्लभ योग होता है।
अमावस्या और शनिवार दोनों ही शनि के प्रभाव में होते हैं। इसलिए यह प्रबल शनि योग बनाता है। इस योग में जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय करने चाहिए। जिनकी कुण्डली में शनि की प्रतिकूल स्थिति होती है उन्हें साढ़ेसाती एवं शनि की ढैय्या के दौरान काफी संघर्ष करना पड़ता है। ज्योतिशास्त्र में शनि अमावस्या के दिन करने योग्य कुछ आसान उपाय बताए गए हैं।

पढ़ें- शनिवार के दिन भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, शनिदेव होते हैं नाराज  
 
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शनि अमावस्या पर 11 बार महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया दशरथ स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। शनि महाराज ने स्वयं दशरथ जी को वरदान दिया था कि जो व्यक्ति आपके द्वारा लिखे गये स्तोत्र का पाठ करेगा उसे मेरी दशा के दौरान कष्ट का सामना नहीं करना होगा।
 
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इस दिन जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके तीन परिक्रमा करने से शनि प्रसन्न होते हैं। 
 

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शनिवार के दिन उड़द दाल की खिचड़ी खाने से भी शनि दोष के कारण प्राप्त होने वाले कष्ट में कमी आती है।

 
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शनि को खुश करने के लिए ज्योतिषशास्त्र में कुछ मंत्रों का भी उल्लेख किया गया है। जैसे शनि वैदिक मंत्र 'ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु न:।'शनि का पौराणिक मंत्र 'ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तण्डसंभुतं नमामि शनैश्चरम।' इन मंत्रों का नियमित कम से कम 108 बार जप करने से शनि के प्रकोप में कमी आती है।
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शनिवार को शाम के समय पीपल वृक्ष के चारों ओर 7 बार कच्चा सूत लपेटें, इस समय शनि के किसी मंत्र का जप करते रहें। फिर पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
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