यूं तो माता का प्रमुख वाहन सिंह माना जाता है लेकिन माता के अलग-अलग रुप हैं और उनके अलग-अलग वाहन भी हैं। इसलिए ज्योतिषशास्त्र में माता के आगमन के दिन यानी कलश स्थापन के दिन से यह आकलन लगाया जाता है कि इस वर्ष माता का आगमन किस वाहन से होगा और माता किस वाहन से वापस अपने लोक जाएंगी। माता के अगमन और प्रस्थान के वाहन से आने वाले साल की भविष्यवाणी की जाती है। तो आइये देखें क्या कहती हैं ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा।
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जानिए, इस साल माता किस वाहन से आएगी और क्या होगा इसका परिणाम
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शास्त्रों में कहा गया है कि 'शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता' इसका अर्थ है सोमवार व रविवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापन होने पर मां दुर्गा हाथी पर आती हैं।
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शनिवार तथा मंगलवार को कलश स्थापन होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार अथवा शुक्रवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं। बुधवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता नाव पर सावर होकर आती हैं। इस वर्ष मंगलवार के दिन कलश स्थापन यानी प्रथम पूजा होने से माता का आगमन घोड़े पर हो रहा है।
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घोड़ा युद्ध का प्रतीक माना जाता है। घोड़े पर माता का आगमन शासन और सत्ता के लिए अशुभ माना गया है। इससे सरकार को विरोध का सामना करना पड़ता है और सत्ता परिवर्तन का योग बनता है। संभव है कि कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन होगा। देश के कई भागों में प्राकृतिक आपदा के कारण जान-माल का नुकसान हो सकता है। पड़ोसी देशों के साथ संबंध में कड़वाहट बढ़ सकती है।
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विजयादशमी 22 अक्तूबर को गुरुवार के दिन है। शास्त्रों के अनुसार गुरुवार के दिन विजयादशमी होने पर माता डोली में सवार होकर वापस कैलाश की ओर प्रस्थान करती हैं। माता की विदाई डोली में होने के कारण महामारी, अकाल और भूकंप की आशंका रहेगी।