द्रौपदी के विषय में कहा जाता है कि वह इतनी सुंदर और आकर्षक थी कि जो भी उसे देखता मोहित हो जाता था। यही कारण था कि द्रौपदी पर कई पुरुष मोहित हुए और उसे पाने के लिए गलत कदम भी उठा बैठे। इनमें एक तो जयद्रथ थे जिसने वनवास के दौरान द्रौपदी का अपहरण तक कर लिया था। लेकिन पांडवों ने जयद्रथ के हाथों से द्रौपदी को मुक्त करवाकर उसे प्राणदंड के समान सजा दी। लेकिन अज्ञातवश के समय जब द्रौपदी की लाज खतरे में आई तो युधिष्ठिर ने भी कर दिया था रक्षा करने से इंकार।
जब युधिष्ठिर ने किया द्रौपदी की लाज बचाने से इंकार, भीम बने हथियार
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यह घटना उन दिनों की है जब पांडव अज्ञातवश का एक वर्ष पूरा करने लिए राजा विराट के राज्य में अलग-अलग नामों से नौकरी कर रहे थे। उन दिनों द्रौपदी सैरंध्री नाम से राजा विराट की महारानी सुदेष्णा की सेवा में थी।