ज्येष्ठ कृष्णपक्ष की अमावस्या को वट सावित्री व्रत किया जाता है। आज यानी मंगलवार को वट सावित्रि व्रत किया जा रहा है। इस दिन सुहागिनें दिन वट वृक्ष (बरगद) का पूजन करती हैं।
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vat savitri vrat
पंडित अरविंद पांडे ने बताया कि पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत किया जाता है। जिन महिलाओं की संतान हैं वह अपनी संतान के लिए भी यह व्रत करती हैं।
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- फोटो : vat
शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री व्रत में पूजन सामग्री विशेष महत्व होता है। अगर आपने पूजन में इन सामगियों का प्रयोग नहीं किया तो यह व्रत का अधूरा रह जाता है।
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puja aarti
वट सावित्री पूजन सामग्री: सत्यवान-सावित्री की मूर्ति, बांस का पंखा, लाल धागा, धूप, मिट्टी का दीपक,घी,फूल, फल (आम, लीची और अन्य फल), कपड़ा 1.25 मीटर का दो, सिंदूर, जल से भरा हुआ पात्र और रोली।
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वट सावित्री की पूजा के लिए विवाहित महिलाओं को बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करनी होती है। सुबह स्नान करके दुल्हन की तरह सजकर एक थाली में प्रसाद जिसमे गुड़, भीगे हुए चने, आटे से बनी हुई मिठाई, कुमकुम, रोली, मोली, 5 प्रकार के फल, पान का पत्ता, धुप, घी का दीया, एक लोटे में जल और एक हाथ का पंखा लेकर बरगद पेड़ के नीचे जाएं।
पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं, उसके बाद प्रसाद चढाकर धूप, दीपक जलाएं। उसके बाद सच्चे मन से पूजा करके अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। पंखे से वट वृक्ष को हवा करें और सावित्री मां से आशीर्वाद लें। फिर बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चे धागे से या मोली को 7 बार बांधे और प्रार्थना करें। उसके बाद अपना व्रत खोल लें।