diwali
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धनतेरस पर मुख्य रुप से धनवंतरी भगवान और लक्ष्मी पूजन किया जाता है। लेकिन इस दिन यम के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। इस दीपक को रात्रि के समय जलाया जाता है, जब परिवार के सभी सदस्य घर में आ चुके हो। यम का दीपदान करने के लिए पुराना दीपक प्रयोग मान लाया जाता है। यम का दीपक जलाने के लिए उसमें सरसों का तेल और बत्ती डालकर दरवाजे के बाहर या फिर कूड़ें के स्थान के निकट दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दिया जाता है। क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना गया है। मान्यता है कि यह दीपक जलाने के परिवार पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस बात का वर्णन पौराणिक कथा में भी मिलता है। यम का दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीतयामिति।