12 ज्योर्तिलिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल मंदिर में नरक चतुर्दशी के अवसर पर भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस मौके पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में जुटने लगी।
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दिवाली से ठीक एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। नरक चतुर्दशी का त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है।
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इस दिन प्रातः काल स्नान करके यम तर्पण और शाम के समय दीप दान का बड़ा महत्व होता है।
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पुराणों की कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को नरकासुर नाम के असुर का वध किया। नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था।
शिवपुराण के अनुसार भस्म सृष्टि का सार है। एक दिन संपूर्ण सृष्टि इसी राख के रूप में परिवर्तित हो जानी है। इस सृष्टि के सार भस्म यानी राख को शिवजी सदैव धारण किए रहते हैं।