हीरा और सोना महिलाओं को सबसे प्रिय होते हैं लेकिन कई बार सोना और हीरा धारण करना इन्हें महंगा पड़ सकता है क्योंकि इनकी वजह से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से गर्भ धारण तक में दिक्कत हो सकती है।
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इन स्थितियों में महिलाओं को सोना और हीरा धारण करने से बचना चाहिए
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हीरा
यह बात किसी नए शोध से सामने नहीं आयी है बल्कि सदियों पहले इस बात का जिक्र हमारे शास्त्रों में किया जा चुका है। इसलिए अगर आप सोना, हीरा धारण करते हैं या इन्हें धारण करने की सोच रहे हैं तो पहले यह जान लीजिए कि यह आपके लिए शुभ फलदायी रहेगा या इसकी वजह से आपको उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान।
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इन स्थितियों में महिलाओं को सोना और हीरा धारण करने से बचना चाहिए
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हीरा
ज्योतिषशास्त्र में हीरा को शुक्र का रत्न बताया गया है जबकि सोना गुरु से संबंधित धातु है। गुरु और शुक्र दोनों ही शुभ ग्रह हैं और दोनों का ही प्रभाव वैवाहिक जीवन और भौतिक सुख सुविधाओं पर होता है। हीरा धारण करने से धन और वैवाहिक जीवन के सुख में वृद्धि होती है तो गलत समय पर इसे धारण से इसका बुरा फल भी भोगना पड़ता है जिसका उल्लेख शुक्राचार्य ने शुक्र नीति में किया है।
इन स्थितियों में महिलाओं को सोना और हीरा धारण करने से बचना चाहिए
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हीरा
शुक्राचार्य जी कहते हैं-'न धारयेत् पुत्र कामानारी वज्रम कदाचनः।' यानी जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति की चाहत हो उन्हें हीरा धारण नहीं करना चाहिए। अगर आप हीरा धारण करते हैं तो गर्भधारण करने से पूर्व तक इसे धारण कर सकते हैं लेकिन इसके बाद धारण करने से गर्भ को नुकसान हो सकता है।
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इन स्थितियों में महिलाओं को सोना और हीरा धारण करने से बचना चाहिए
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हीरे की अंगूठी
शुक्राचार्य कहते हैं कि गर्भ धारण से पूर्व और प्रसव के बाद हीरा धारण करना सुख और वैभव में वृद्धि लाता है। लेकिन गर्भधारण के दौरान हीरा धारण करना संतान सुख में बाधक माना गया है।
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इन स्थितियों में महिलाओं को सोना और हीरा धारण करने से बचना चाहिए
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हीरा
इसी तरह जब सोना कमर के नीचे धारण किया जाता है तब यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। यही वजह है कि सोना हमेशा नाभि के ऊपर धारण किया जाता है।
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इन स्थितियों में महिलाओं को सोना और हीरा धारण करने से बचना चाहिए
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gold market
- फोटो : FILE PHOTO
नाभि के नीचे सोना धारण करने से शरीर के नीचले भागों में गर्मी बढ़ती है जो गर्भधारण से लेकर शरीर के नीचले भागों में रोग को भी बढ़ाने का काम करता है। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। धार्मिक दृष्टि से इसका कारण कुछ और भी बताया जाता है।
धार्मिक दृष्टि से देखें तो सोना में गुरू का वास माना जाता है। नाभि से नीचे का हिस्सा पवित्र नहीं माना जाता है इसलिए जनेऊ भी कमर से ऊपर तक पहना जाता है। नाभि के नीचे और पैरों में सोना धारण करने से गुरु का अपमान होता है। इससे गुरु प्रतिकूल होते हैं और व्यक्ति के सुख एवं वैभव का नाश करते हैं।