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Dhundiraj Chaturthi 2026: ढुण्डिराज चतुर्थी कब? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

Fri, 20 Feb 2026 12:36 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Dhundiraj Chaturthi:  ढुण्डिराज चतुर्थी हिंदू धर्म में एक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे मनोरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोरथ पूरे होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक संतुलन आता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा, जब शुभ, शुक्ल और रवि योग का संयोग बन रहा है।
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ढुण्डिराज चतुर्थी - फोटो : amar ujala
Dhundiraj Chaturthi 2026: ढुण्डिराज चतुर्थी हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व माना जाता है। इसे मनोरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्तजन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गणेशजी की भक्ति भाव से की गई प्रार्थनाओं से सभी मनोरथ पूरे होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का प्रवेश होता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों और मंदिरों में विशेष पूजा विधि के साथ गणेशजी की आराधना करते हैं।
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इस वर्ष ढुण्डिराज चतुर्थी 21 फरवरी 2026 को पड़ रही है। इस दिन शुभ, शुक्ल और रवि योग का संयोग बन रहा है, जो इस पर्व के महत्व को और भी बढ़ाता है। भक्तजन पूरे मन और श्रद्धा के साथ भगवान गणेश के सामने पूजा करते हुए अपने जीवन में खुशहाली, सफलता और मानसिक संतुलन की कामना करेंगे। यह दिन विशेष रूप से आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होता है और इसे मनाने से परिवार और व्यक्तिगत जीवन दोनों में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।
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ढुण्डिराज चतुर्थी - फोटो : freepik
ढुण्डिराज चतुर्थी तिथि 
द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 20 फरवरी 2026 को दोपहर 2:37 बजे से आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 21 फरवरी 2026 को दोपहर 1:00 बजे समाप्त होगी। इसी कारण 21 फरवरी को पूरे देश में ढुण्डिराज चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की जाती है।
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ढुण्डिराज चतुर्थी - फोटो : Adobe stock
ढुण्डिराज चतुर्थी शुभ और शुभ मुहूर्त 
ढुण्डिराज चतुर्थी के दिन शुभ, शुक्ल और रवि योग का विशेष संयोग बन रहा है। शुक्ल योग पूरे दिन और रात भर प्रभावी रहेगा, जबकि रवि योग दोपहर 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस समय भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
इस दिन पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक क्रियाओं के लिए विशेष मुहूर्त भी बताए गए हैं।
  • ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5:13 बजे से 6:04 बजे तक रहेगा।
  • विजय मुहूर्त दोपहर 2:28 बजे से 3:14 बजे तक रहेगा।
  • गोधूलि मुहूर्त सायं 6:13 बजे से 6:38 बजे तक रहेगा।
  • निशिता मुहूर्त रात्रि 12:09 बजे से 1:00 बजे तक रहेगा।
इन शुभ समयों में गणेशजी की पूजा करने से विशेष फल और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
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ढुण्डिराज चतुर्थी - फोटो : freepik
क्यों मनाई जाती है ढुण्डिराज चतुर्थी?
ढुण्डिराज चतुर्थी का धार्मिक महत्व अत्यंत बड़ा है। यह पर्व भगवान गणेश के ढुण्डिराज स्वरूप की विशेष पूजा से जुड़ा है, जिन्हें भक्त अपनी सभी इच्छाओं और मनोरथों की पूर्ति करने वाला मानते हैं। मत्स्य पुराण में इसे मनोरथ चतुर्थी कहा गया है, और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। गणेश जी को सभी देवताओं में प्रथम पूज्य माना जाता है, इसलिए उनकी आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और खुशहाली आती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो नई शुरुआत कर रहे हैं – जैसे नया व्यवसाय, शिक्षा या विवाह।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि इस व्रत से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। वाराह पुराण में इसे अविघ्नकर व्रत कहा गया है, जिसे चार महीने तक रखा जाता है और आषाढ़ में इसका उद्यापन किया जाता है। पुराणों के अनुसार, राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ की सफलता के लिए, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर से युद्ध से पहले और भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन से पहले इस व्रत का पालन किया था। इससे स्पष्ट होता है कि यह व्रत केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि देवताओं द्वारा भी किए जाने वाला पवित्र कर्म है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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