छठ महापर्व के चौथे और आखिरी दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। इसी के साथ व्रती घाट पर ही पूजा के बाद प्रसाद खाकर अपना व्रत खोलते हैं। 24 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ छठ पर्व सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त हो जाएगा। जानें सप्तमी का पूजा मुहूर्त
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पर्व के आखिरी दिन व्रती भोर में ही घाट पर पहुंचकर जल में उतर जाते हैं। नारियल, धूप-बत्ती आदि हाथ में लिए व्रती जल में खड़े रहकर ही सूर्य देव के दर्शन का इंतजार करते हैं।
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सप्तमी को सूर्य देव सुबह 6:34 बजे के करीब अपनी लालिमा बिखेरने लगेंगे। यानी इस समय सूरज दिखने लग जाएगा।
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जहां डूबते सूरज को जल से अर्घ्य दिया जाता है, वहीं उगते सूरज को गाय के कच्चे दूध से अर्घ्य देने का विधान है।
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इस दिन व्रतियों को परिवार और आस पास के लोग अर्घ्य देते हैं। इसी अर्घ्य के साथ छठ माता के परिवार की सुख शांति की कामना कर व्रती घाट पर ही एक दूसरे को प्रसाद बांटने के बाद खुद ग्रहण करते हैं।