चौरचन की पूजा थाली में सजते हैं ये पारंपरिक पकवान
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चौरचन की पूजा थाली में सजते हैं ये पारंपरिक पकवान
चौरचन की तैयारियां पर्व से एक दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं। घरों में पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में मटकुरी, छैछ या छाछ कहा जाता है, में दही जमाया जाता है। चौरचन के दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देते समय दही के साथ कई तरह के पारंपरिक पकवान और फल अर्पित किए जाते हैं। प्रसाद में मीठी पूरी (खबोनी), मूंग दाल की पूरी (दलपुरी), खीर, पिड़ुकिया और मौसमी फल प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। बचा हुआ प्रसाद और पूजा से संबंधित अवशेष परंपरा के अनुसार उसी स्थान पर मिट्टी में दबा दिए जाते हैं। इस तरह चौरचन केवल चंद्र पूजा का पर्व नहीं, बल्कि मिथिला की पारिवारिक एकजुटता और लोकसंस्कृति की सुंदर झलक भी प्रस्तुत करता है।
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