चंद्रमा दर्शन
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गणेश चतुर्थी पर क्यों नही करते हैं चंद्रदर्शन ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि, जब माता पार्वती के आदेशनुसार गणेश जी मुख्य द्वार पर पहरा दे रहे थे। तब भगवान शिव वहां पर आये और भीतर जाने के लिए कदम बढ़ाने लगे। वहां मौजूद गणेश जी ने शिव जी को अदंर जाने से रोका। लेकिन फिर भी भगवान शिव बार-बार अदंर जाने की जिद करने लगे। गणेश जी के समझाने पर भी भगवान शिव नही मानें। अंत में गुस्साए शिव जी ने गणेश जी का सिर काट दिया। उसी समय माता पार्वती वहां आ गई। माता पार्वती ने शिव जी को बताया कि, ये पुत्र गणेश हैं। आप शिघ्र ही उन्हें पुन: जीवित करें। तब शिव जी ने गणेश जी को गजानन मुख प्रदान कर जीवन दान दिया।
दोबारा जीवन पाने पर सभी देवता गणेश जी को आशीर्वाद दे रहे थे। हालांकि, वहां मौजूद चंद्र देव खड़े होकर मुस्करा रहे थे। तब गणेश जी समझे कि ये चंद्रदेव उनके गजानन मुख को देखकर हंसी उड़ा रहें हैं। इस बात से नराज गणेश जी ने चंद्र देव को श्राप दे दिया कि, 'तुम हमेशा के लिए काले हो जाओगे'। गणेश जी के इस श्राप से चंद्र देव काले हो गए। तब चंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान गणेश से क्षमा मांगी तो गणेश जी ने कहा कि, सूर्य का प्रकाश पाकर तुम एक दिन पूर्ण हो जाओगे, लेकिन चतुर्थी का ये दिन तुम्हें दंड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। गणेश जी ने ही चंद्रमा को श्राप दिया था कि जो कोई व्यक्ति भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा।