18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर सैकड़ों वर्षों बाद बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में लोग भूलकर भी ये 5 काम न करें, अशुभ हो जाएगा।
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अक्षय तृतीया
- फोटो : अमर उजाला
अक्षय तृतीया तिथि का प्रारंभ मंगलवार 17 अप्रैल की रात्रि 3.45 बजे से शुरू होगा। 18 अप्रैल बुधवार की रात्रि 1.45 बजे पर समाप्त हो रहा है। सूर्य सिद्धांत ग्रंथ में ऐसा वर्णन है कि कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण में मेष राशि में सूर्य के होने पर सतयुग का प्रारंभ हुआ। भविष्य पुराण के अनुसार त्रेता युग का प्रारंभ भी इसी दिन हुआ था। इसी दिन बद्रीनाथ धाम में नर-नारायण का अवतार हुआ था।
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अक्षय तृतीया
यह बात सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही। बीरेंद्र नारायण का कहना है कि 18 अप्रैल को सूर्योदय के समय सूर्य मेष राशि में है। कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण में है और सूर्य मेष राशि में हैं। ऐसा संयोग सैकड़ों वर्ष बाद आता है। कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य मेष राशि में होने के कारण फलदायिनी योग बन रहा है।
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अक्षय तृतीया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन पिंड के बिना भी श्राद्ध करने का विधान है। गंगा और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। इसलिए जल से भरा कलश, पंखा, जूता, भूमि और गोदान का महत्व है। अक्षय तृतीया को गंगा स्नान करना पुण्यकारी माना गया है। जिसके कुंडली में पितर दोष है, वे पितरों का पिंडदान, तर्पण कर सकते हैं। अक्षय तृतीया को सोना खरीदना, जमीन खरीदना, गृह प्रवेश, नया व्यापार करना, तीर्थयात्रा बहुत ही शुभ माना है।
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अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीय के दिन सारे रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं। यह बहुत ही शुभ दिन होता है। इस दिन मां लक्ष्मी सबपर अपनी कृपा बरसाती है। लेकिन उनकी पूजा में कुछ गलतियां बिल्कुल भी न करें। इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व होता है। तो इस दिन कुछ न कुछ जरूर खरीदें। वैसे तो सोना चांदी खरीदने से काफी लाभ होता है। लेकिन यह न खरीद सकें तो बर्तन आदि भी खरीद सकते हैं। ऐसा न करना अशुभ माना जाता है।
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अक्षय तृतिया
इस दिन कहा जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि नहाने और साफ कपड़े पहनने के बाद ही तुलसी को तोड़ें। वरना लक्ष्मी माता नाराज हो जाती हैं। इस दिन वैसे तो व्यक्ति का मन शांत रहता है। लेकिन माना जाता है कि इस दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए। शांत स्वाभाव से ही सबसे मिलना जुलना चाहिए। शांत मन से मां लक्ष्मी की पूजा करने से आपको अधिक फल मिलता है।
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श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी
- फोटो : अमर उजाला
इस दिन साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। घर के हर कोने को साफ करना चाहिए। गंदे स्थान पर पूजा नही करनी चाहिए। माता के लिए नया स्थान भी लगा सकते हैं। वैसे तो बड़ों का आदर हमेशा ही करना चाहिए। लेकिन अगर कोई इस दिन बड़ों का आदर नहीं करता है या फिर उनसे अपशब्द करता है तो यह करना आपकी जिंदगी पर सबसे ज्यादा अशुभ प्रभाव डालेगा।
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद भी अगर कोई व्यक्ति मन में द्वेष की भावना रखता है या दूसरों का बुरा करने की सोचता है तो मां लक्ष्मी उसके पास कभी नही रुकती। इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। जो भी हो सकते पंडित या गरीबों का दान जरूर दें। इस दिन दान देने से या गरीबों को भोजन कराना शुभ होता है। वरना आपकी जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।