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Chanakya Niti In Hindi: ये हैं असली तीन रत्न, जो है सुखी जीवन का आधार

Tue, 19 Jan 2021 08:15 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य ने कई शास्त्र लिखें जिनमें से नीति शास्त्र भी मुख्य है। नीति शास्त्र की बातें लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हैं। ये बातें जितनी लोकप्रिय हैं उतनी ही सीख देने वाली भी हैं। चाणक्य नें नीतिशास्त्र में ऐसी अनेकों नीतियों का वर्णन किया है, जिन्हें अपने जीवन में उतारकर मनुष्य अपने जीवन की हर परिस्थिति का सामना करते हुए अपने जीवन में सुखी और सफल हो सकता है। नीतिशास्त्र में चाणक्य ने तीन चीजों के बारें में कहा है कि ये ही धरती पर मौजूद असली रत्न हैं। तो चलिए जानते हैं कि वे कौन सी तीन चीजें हैं जिन्हें आचार्य चाणक्य ने असली रत्न कहा है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि अन्नमाप: सुभोषितम्। 
मूढै: पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञां विधीयते।।
 
आचार्य चाणक्य इस श्लोंक के माध्यम से कहते हैं कि अन्न, जल तथा सुंदर शब्द, पृथ्वी पर मौजूद तीन असली रत्न हैं। पत्थर के टुकड़ों (हीरा, जवाहरात) को रत्न का नाम देने वाले मूर्ख हैं। 
 
यहां पर आचार्य चाणक्य के कहने का तात्पर्य यह है कि हीरे जवाहरात आदि तो केवल पत्थर के टुकड़े हैं, जीवन के असली रत्न तो अन्न जल और मधुर वाणी है। इसलिए चाणक्य का कहना है कि इन असली रत्नों के मूल्यों को न समझकर हीरे जवाहरात को रत्न कहना मूर्खता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : social media
यह तो हर व्यक्ति को पता है कि जल ही जीवन है।  फिर भी मनुष्य द्वारा कई बार जल का दुरपयोग किया जाता है, जीवन जीने के लिए जल बहुत ही उपयोगी है। पीने के साथ ही दैनिक जीवन में हर कार्य के लिए जल की आवश्यकता होती है। चाणक्य की इस नीति से सीख मिलती है कि जल हमारे जीवन में एक अनमोल रत्न की तरह है इसलिए इसका कभी दुरपयोग नहीं करना चाहिए।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
अन्न के द्वारा ही व्यक्ति के जीवन का भरण पोषण होता है। किसी भी कार्य को करने और एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमें भोजन से ही ऊर्जा और पोषण प्राप्त होता है। इसलिए अन्न भी हमारे पृथ्वी पर मौजूद प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदान किया गया एक अनमोल रत्न है। कभी भी रत्न का दुरपयोग नहीं करना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : social media
एक खुशहाल और सम्मानित जीवन जीने के लिए मधुर वाणी बोलना बहुत ही आवश्यक होता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए। मधुर वाणी बोलने वाले व्यक्ति को हमेशा सम्मान प्राप्त होता है। इसलिए आचार्य चाणक्य ने मधुर वाणी को भी असली रत्न की संज्ञा दी है।
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