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चाणक्य नीतिः इन तीन चीजों से बनाए रखें निश्चित दूरी, नहीं तो हो सकता है भारी नुकसान

Fri, 10 Jul 2020 03:47 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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चाणक्य नीति - फोटो : Social media
चाणक्य वेदों और शास्त्रों के ज्ञाता होने के साथ एक अच्छे कूटनीतिज्ञ भी थे। चाणक्य ने अपने अनमोल विचारों को चाणक्य नीति में पिरोया है। चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर चाणक्य की नीतियों पर अमल किया जाए तो हम जीवन में आने वाली कई परेशानियों से बच सकते हैं। आइए जानते हैं उनके अनमोल विचार..
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चाणक्य नीति - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में एक श्लोक बताया है। जो इस तरह है -

अत्यासन्ना विनाशाय दूरस्था न फलप्रदा:। 
सेवितव्यं मध्याभागेन राजा बहिर्गुरू: स्त्रियं:।।


इस श्लोक में चाणक्य ने कहा है कि राजा या जो व्यक्ति आर्थिक रुप से बलवान हो, आग और स्त्री, ये तीन ऐसी चीजें हैं न ही तो इनके ज्यादा करीब जाना चाहिए न ही इनसे ज्यादा दूर जाना चाहिए। यानि संतुलन बनाकर एक निश्चित दूरी रखनी चाहिए। लेकिन चाणक्य ने ऐसा क्यों कहा है यह जानना भी आवश्यक है आइए जानते हैं। 
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चाणक्य नीति - फोटो : Social media
किसी भी व्यक्ति को राजा या सामाजिक तौर पर शक्तिशाली व्यक्ति से ज्यादा दूरी बनाने से उनसे मिलने वाले लाभ से भी दूर हो जाएंगे। लेकिन अगर हम इनके ज्यादा करीब जाते हैं तो सम्मान को चोट पहुंचने के साथ दंड या किसी षडयंत्र का शिकार या कैद होने  का डर रहता है। 

अगर कोई सामाजिक और आर्थित रुप से बलवान व्यक्ति आपको लाभ पहुंचा सकता है तो वह अपना शक्ति का प्रयोग करके नुकसान भी पहुंचा सकता है इसलिए जो व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक रुप से बलवान हो या राजा के पद पर हो उससे न तो ज्यादा दूरी अच्छी है न ज्यादा उसके करीब जाना इसलिए एक सीमा तक दूरी बनाकर रखें। 

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चाणक्य नीति - फोटो : Social media
अग्नि को अगर बर्तन से ज्यादा दूरी पर रखा जाए तो खाना तक नहीं बन सकता है। न ही अग्नि से ज्यादा दूर होने पर आपको उससे कोई और लाभ होगा लेकिन आग के ज्यादा करीब जाने से हाथ अवश्य जल जाता है। 
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चाणक्य नीति - फोटो : social media
चाणक्य कहना है कि स्त्री को कमजोर नहीं समझना चाहिए क्योंकि इस सृष्टि के निर्माण में जितना योगदान पुरुष का है, उतना ही स्त्री का भी है। किसी स्त्री के अत्यधिक करीब जाने से व्यक्ति को ईर्ष्या का और ज्यादा दूरी बनाने से घृणा तथा निरपेक्षता मिलती है। 
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