आचार्य चाणक्य
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बच्चों को दें संस्कारों का पूर्ण ज्ञान
चाणक्य के अनुसार जीवन शिक्षा का महत्व तभी होता है जब छात्र को संस्कारों के बारे में भी पूर्ण ज्ञान हो। एक बालक के उसके माता पिता और परिवार ही से प्रथम पाठशाला होते हैं। बच्चा अपने जीवन में वही सीखता या करता है जो उसे विरासत में अपने माता पिता और परिवार से मिला हो। इसलिए माता पिता को बाल्यकाल से ही बच्चों में अच्छे संस्कारों की नींव डालनी चाहिए।संस्कारों शिक्षा के मिश्रण से ही संतान श्रेष्ठ बनती है।