आचार्य चाणक्य
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बनाएं रखें रिश्तों की गरिमा
किसी भी रिश्ते की गरिमा तभी तक होती है, जब एक दूसरे के प्रति मन में मान-सम्मान होता है। हर रिश्ते की गरिमा बनाएं रखना बहुत आवश्यक होता है, इसलिए कभी भी क्रोध में आकर दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में उसके मान को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। जो व्यक्ति अहंकार को त्यागकर सभी का सम्मान करता है, ऐसे व्यक्ति को समय आने पर हर व्यक्ति का सहयोग प्राप्त होता है।