आचार्य चाणक्य
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शिष्य के कर्म गुरू को
जब कोई शिष्य अच्छे कार्य करता है तो उसका श्रेय गुरू को जाता है, इसी तरह से जब कोई शिष्य गलत कार्य करता है तो उसका फल गुरू को भोगना पड़ता है। गुरू का कार्य होता है कि वह अपने शिष्य को सही राह दिखाए। उसे सही और गलत के बीच सही को चुनने के लिए प्रेरित करें। यदि शिष्य गलत राह पर चलता है तो इसके दोष गुरू को ही दिया जाता है।