चाणक्य बहुत ही कूटनीतिज्ञ और प्रकांड अर्थशास्त्री थे, उन्होंने अपने ज्ञान और बुद्धिमत्ता के बल पर चंद्रगुप्त को एक शासक के रुप में स्थापित किया और इतिहास की धारा को एक नया रूप प्रदान किया। उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव को अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र जैसी पुस्तकों में पिरोया है। चाणक्य कहते हैं कि सभ्य इंसान वही होता है जिसमें शर्म और लिहाज हो, चाणक्य ने व्यक्ति को सभ्यता के साथ रहने की बातें बताई हैं लेकिन चाणक्य के अनुसार कुछ कार्यों को करते समय व्यक्ति को संकोच नहीं करना चाहिए। नहीं तो व्यक्ति को जीवन में इन बातों को लेकर नुकसान हो सकता है।