फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चाणक्य नीति: जीवन में इन तीन बातों का रखें ध्यान, तो कभी नहीं उठाना पड़ेगा नुकसान

Mon, 15 Mar 2021 05:48 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 4
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान और शिक्षक थे। उन्हें किताबी विषयों की गहरी समझ होने के साथ ही व्यवहारिक जीवन का भी बहुत अनुभव था। उनके द्वारा कई शास्त्र लिखे गए जिसमें से चाणक्य की नीतियां इतने सालों के बाद भी लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं। इसके पीछे कारण यह है कि नीतिशास्त्र में लिखी गई बातें व्यक्ति के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पर्श करती हैं। यदि नीतिशास्त्र में लिखी गई बातों के मर्म को भलिभांति समझकर अपने जीवन में उतार लिया जाए तो मनुष्य एक सफल और सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। ये नीतियां व्यक्ति को जीवन जीने की सही राह दिखाती हैं। नीतिशास्त्र में आचार्य चाणक्य ने ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया है। इन बातों को हमेशा ध्यान में रखा जाए तो काफी हद तक मनुष्य अपने आप को नुकसान से बचा सकता है।
विज्ञापन

2 of 4
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
क्रोध में उत्तर मत दीजिए
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को कभी क्रोध के समय उत्तर नहीं देना चाहिए। जब मनुष्य को क्रोध आता है तो उस समय वह कुछ भी सही और गलत समझने की स्थिति में नहीं रहता है। वह स्वयं पर नियंत्रण खो देता है, इसलिए क्रोध के समय चुप रहना ही बेहतर होता है। क्रोध में आकर कही गई कोई भी बात आपके लिए नुकसान दायक हो सकती है। 
विज्ञापन

3 of 4
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आनंद में वचन मत दीजिए
आचार्य चाणक्य के अनुसार कभी भी व्यक्ति को आनंद के समय वचन नहीं देना चाहिए। बिना सोचे-समझे दिया गया वचन आपके लिए भविष्य में नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। व्यक्ति को किसी को वचन देते समय भलिभांति विचार कर लेना चाहिए कि आने वाले समय में उसके क्या परिणाम हो सकते हैं। तभी कोई वचन देना चाहिए।
 
विज्ञापन

4 of 4
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
दुख में निर्णय न लें
दुख के समय व्यक्ति की मानसिक स्थिति बहुत नाजुक होती है। व्यक्ति में उस समय सही और गलत का निर्णय लेने की क्षमता नहीं रहती है। भावुकता में लिया गया कोई भी निर्णय आने वाले समय में परिस्थितियां बदलने पर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। इसलिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दुख के समय  कोई महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेना चाहिए।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें