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Chaitra Navratri 2022: आज है नवरात्रि का सातवां दिन, ऐसे करें मां कालरात्रि की पूजा और पढ़ें ये मंत्र

Fri, 08 Apr 2022 07:47 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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मां दुर्गा को कालरात्रि का रूप शुम्भ, निशुम्भ और रक्तबीज को मारने के लिए लेना पड़ा था। - फोटो : amar ujala
Chaitra Navratri 2022: नवरात्रि में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की आराधना की जाती है, मां कालरात्रि की पूजा से भूत प्रेत, अकाल मृत्यु ,रोग, शोक आदि सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। 8 अप्रैल यानी आज चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि है। मां दुर्गा को कालरात्रि का रूप शुम्भ, निशुम्भ और रक्तबीज को मारने के लिए लेना पड़ा था। मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत ही भयानक है। लेकिन मां का हृदय अत्यंत ही कोमल है। मां अपने भक्तों को सभी प्रकार की परेशानियों से मुक्ति दिलाती है। देवी कालरात्रि का पूजन मात्र करने से समस्त दुखों एवं पापों का नाश हो जाता है। देवी कालरात्रि के ध्यान मात्र से ही मनुष्य को उत्तम पद की प्राप्ति होती है साथ ही इनके भक्त सांसारिक मोह माया से मुक्त हो जाते हैं। तो आइए जानते हैं माता कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व, मां कालरात्रि की पूजा विधि, देवी कालरात्रि की कथा, कालरात्रि का मंत्र और माता कालरात्रि की आरती
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8 अप्रैल यानी आज चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि है।
मां कालरात्रि पूजा मुहूर्त
सप्तमी तिथि आरंभ: 07 अप्रैल, गुरुवार , रात्रि 08:32 से 
सप्तमी तिथि समाप्त: 08 अप्रैल, शुक्रवार,रात्रि 11:05 पर। ऐसे में देवी कालरात्रि की पूजा आज होगी। 
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देवी कालरात्रि का पूजन मात्र करने से समस्त दुखों एवं पापों का नाश हो जाता है। - फोटो : SELF
शुभ योग
 
शोभन योग आरंभ:  7 अप्रैल, गुरुवार रात्रि  10: 42 से
शोभन योग समाप्त: 8 अप्रैल, शुक्रवार, प्रातः 10:31 तक   
सर्वार्थ सिद्धि योग: देर रात 01:43 बजे से लेकर अगले दिन 09 अप्रैल प्रातः  06:02 तक 
शुभ समय:  प्रातः 11:58 से दोपहर 12:48  तक। 

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देवी भागवत पुराण के अनुसार, देवी कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है और इनके श्वास से आग निकलती है। - फोटो : SELF
मां कालरात्रि का स्वरूप
देवी भागवत पुराण के अनुसार, देवी कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है और इनके श्वास से आग निकलती है। मां के बाल बड़े और बिखरे हुए हैं और गले में पड़ी माला बिजली की तरह चमकती रहती है। मां कालरात्रि को आसरिक शक्तियों का विनाश करने वाला बताया गया है। इसके साथ ही मां के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल व गोल हैं। मां के चार हाथ हैं, जिनमें एक हाथ में खडग् अर्थात तलवार, दूसरे में लौह अस्त्र, तीसरे हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा वरमुद्रा में है।
 
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मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ यानी गधा है। - फोटो : अमर उजाला
मां कालरात्रि का वाहन
मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ यानी गधा है। जो सभी जीव-जंतुओं में सबसे ज्यादा मेहनती है। मां कालरात्रि अपने इस वाहन पर पृथ्वीलोक का विचरण करती हैं। मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों को काल से बचाती हैं यानी मां के उपासक की अकाल मृत्यु नहीं होती है।
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चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः स्नान करने के बाद पूजा आरंभ करनी चाहिए। 
पूजा विधि
  • चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः स्नान करने के बाद पूजा आरंभ करनी चाहिए। 
  • मां कालरात्रि की पूजा में नियम और अनुशासन का विशेष पालन करना चाहिए। 
  • मां कालरात्रि की पूजा भी उसी प्रकार से होती है जिस प्रकार से अन्य देवियों की पूजा की जाती है। 
  • मां कालरात्रि की पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल,अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि का अर्पण किया जाता है। 
  • इस दिन गुड़ का विशेष महत्व बताया गया है। मां कालरात्रि को लाल रंग प्रिय है। 
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मां काली को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जाप करें। - फोटो : a
मंत्र
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: .
ॐ कालरात्र्यै नम:
ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।

ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी। वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
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चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की आरती करें। - फोटो : self
मां कालरात्रि की आरती 
कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुह से बचाने वाली ॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥

खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥

सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली मां जिसे बचाबे ॥

तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय ॥
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