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Navratri 2021: आदिशक्ति की कृपा पाने के लिए चैत्र नवरात्रि में करें, इन बीज मंत्रों से मां के नौं स्वरुपों की आराधना

Sat, 03 Apr 2021 03:39 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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नवरात्रि 2021 महानवमी - फोटो : अमर उजाला
हर वर्ष छः माह के अंतराल पर नवरात्रि आती हैं। कार्तिक मास में पड़ने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है तो वहीं चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार से आरंभ हो रही हैं। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही नवसंवत्सर यानि हिंदू नववर्ष का आरंभ भी होता है। नवरात्रि में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री माता का पूजन और अर्चन किया जाता है। भक्त इन नौं दिनों तक मां को मनाने के लिए विधि विधान से पूजा करते हैं। पूजा में बीज मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। आप भी नवरात्रि के इन नौं दिनों में मां के बीज मंत्रों से उपासना करके उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। जानिए मां आदिशक्ति के नौं स्वरूपों के नौं बीज मंत्र।
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नवरात्रि 2021 शैलपुत्री माता
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा अर्चना कि जाती है। ये अपने दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। ये पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। पर्वत को शैल भी कहा जाता है, इसलिए ये शैलपुत्री कहलाती हैं। यही भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती हैं। इनकी पूजा का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"शैलपुत्रीः ह्रीं शिवायै नमः"
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नवरात्रि 2021 ब्रह्मचारिणी देवी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी अपने दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण करती हैं। शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा ने पर्वतराज के यहां पुत्री बनकर जन्म लिया और महर्षि नारद के कहने पर अपने जीवन में भगवान महादेव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या के कारण ही इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। इनकी आराधना का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"ब्रह्मचारिणीः ह्रीं श्रीं अम्बिकायै नमः"

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नवरात्रि 2021 चंद्र घंटा माता
नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे रूप देवी चंद्रघंटा की पूजा आराधना की जाती है। ये अपने मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चंद्र धारण करती हैं, इसलिये इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। इनकी दस भुजाए हैं। जिनमें खड्ग आदि विभिन्न अस्त्र और शस्त्र से सुसज्जित हैं। माना जाता है कि इनके घंटे की ध्वनि से बुरी शक्तियां भय से कांपने लगती हैं। इनकी पूजा करने से मन को अलौकिक शांति प्राप्त होती है। मां चंद्रघंटा की उपासना का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"चद्रघंटाः ऐं श्रीं शक्तयै नमः"
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नवरात्रि 2021 कूष्मांडा देवी
नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप कूष्मांडा माता की पूजा-अर्चना की जाती है। इनकी आठ भुजाएं हैं। ये चक्र, गदा, धनुष, कमण्डल, कलश, बाण और कमल धारण करती हैं। इनकी सवारी सिंह है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व जब चारों ओर अंधकार था तो मां दुर्गा ने इस अंड यानी ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण ये कूष्मांडा कहलाई। इनकी साधना का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"कूष्मांडाः ऐं ह्रीं देव्यै नमः"
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नवरात्रि 2021 स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा और अर्चना की जाती है। इनकी गोद में स्कंद हैं। स्कंद शिव और पार्वती के दूसरे और षडानन (छह मुख वाले) पुत्र कार्तिकेय। इसी कारण ये स्कंदमाता कहलाती हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। ये अपनी दाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद अर्थात कार्तिकेय को पकड़ी हुई हैं और इसी तरफ वाली निचली भुजा के हाथ में कमल का फूल है। बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा में वरद मुद्रा है और नीचे दूसरे हाथ श्वेत कमल का फूल है। यह सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिये इनके चारों ओर सूर्य सदृश अलौकिक तेजोमय मंडल सा दिखाई देता है। इनकी उपासना का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"स्कंदमाताः ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नमः"
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नवरात्रि 2021 कात्यायनी देवी
नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा करने का विधान है। इन्होंने कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, उन्होंने ही सर्वप्रथम इनका पूजन किया जिसके कारण ये कात्यायनी कहलाई। इनका रंग स्वर्ण के समान चमकीला है और इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं ओर के ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। इन्होंने बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में खड्ग अर्थात तलवार धारण की है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है। इनका वाहन भी सिंह है। इनकी उपासना करने का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"कात्यायनीः क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः"

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नवरात्रि 2021
नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा करने का विधान है। इनका वर्ण काला है। बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में दिखाई देने वाली माला बिजली की भांति देदीप्यमान है। इनका यह स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है परंतु अपने भक्तों के लिए हर रूप बहुत ही शुभकारी है, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। मां कालरात्रि का स्वरूप तमाम आसुरिक शक्तियों का विनाश करने वाला बताया गया है। इनकी चार भुजाएं हैं जिनमें एक में खड्ग है तो दूसरे में लौह अस्त्र धारण करती हैं। इनका तीसरा हाथ अभयमुद्रा में है और चौथे हाथ वरमुद्रा में है। मां कालरात्रि की उपासना का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"कालरात्रिः क्लीं ऐं श्री कालिकायै नमः"

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नवरात्रि 2021 - फोटो : navratri
नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है। ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इनका वर्ण गौर है, इसलिए ये महागौरी कहलाती हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। इनका ऊपर वाला दाहिना हाथ अभयमुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। ये अपने बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरू धारण करती हैं और नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में रहता है। मां गौरी या महागौरी की साधना करने का बीज मंत्र इस प्रकार है।
"महागौरीः श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नमः"
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navratri
नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धदात्री माता की पूजा और अर्चना का विधान है। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ये कमल के आसन पर विराजमान हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। ये अपने दाहिने ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र धारण करती हैं और ऊपर वाले हाथ में गदा। तो वहीं बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में कमल का फूल और ऊपर वाले हाथ में शंख धारण करती हैं। इनकी उपासना का बीज मंत्र इस प्रकार से है।
"सिद्धिदात्रीः ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नमः"
 
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