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Chaitra Navratri: अनजाने में एक शेर से हुई वर्षों की तपस्या और बन गया मां का वाहन, पढ़ें रोचक कथा

Fri, 20 Mar 2020 05:54 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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बुधवार, 25 मार्च यानी नए हिंदू वर्ष के शुरुआत से ही मां के पावन नवरात्रि भी प्रारंभ हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों मां की पूजा-अर्चना से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। इन 9 दिनों में मां के 9 रुपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है। आपने तस्वीर और प्रतिमाओं में देखा होगा कि देवी मां सिंह पर सवार रहती हैं क्योंकि यह उनका वाहन है। लेकिन शायद ही आप यह जानते होंगे कि यह कैसे बना देवी का वाहन। आइए, आज हम आपको बताते हैं, सिंह कैसे बना मां का वाहन....
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शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने हजारों वर्ष तक तपस्या की। तपस्या से देवी सांवली हो गई। भगवान शिव से विवाह के बाद एक दिन जब शिव पार्वती साथ बैठे थे तब भगवान शिव ने पार्वती से मजाक करते हुए काली कह दिया।
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देवी पार्वती को शिव की यह बात चुभ गई और कैलाश छोड़कर वापस तपस्या करने में लीन हो गई। इस बीच एक भूखा शेर देवी को खाने की इच्छा से वहां पहुंचा। लेकिन तपस्या में लीन देवी को देखकर वह चुपचाप बैठ गया।

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शेर सोचने लगा कि देवी कब तपस्या से उठे और वह उन्हें अपना आहार बना ले। इस बीच कई साल बीत गए लेकिन शेर अपनी जगह डटा रहा। इस बीच देवी पार्वती की तपस्या पूरी होने पर भगवान शिव प्रकट हुए और मां पार्वती को गौरवर्ण यानी गोरी होने का वरदान दिया।

 
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इसके बाद देवी पार्वती ने गंगा स्नान किया और उनके शरीर से एक सांवली देवी प्रकट हुई जो कौशिकी कहलाई और गौरवर्ण हो जाने के कारण देवी पार्वती गौरी कहलाने लगी।


 
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देवी पार्वती ने उस सिंह को अपना वाहन बना लिया जो उन्हें खाने के लिए बैठा था। इसका कारण यह था कि सिंह ने देवी को खाने की प्रतिक्षा में उन पर नजर टिकाए रखकर वर्षो तक उनका ध्यान किया था। देवी ने इसे सिंह की तपस्या मान लिया और अपनी सेवा में ले लिया। इसलिए देवी पार्वती के सिंह और वृष दोनों वाहन माने जाते हैं।
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