चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की पहली तिथि से चैत्र नवरात्रि शुरू होता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 18 मार्च से है। यह वही तिथि है जब इस दिन सृष्टि का आरंभ काल माना जाता है, इसलिए इस तिथि पर घरों में कलश स्थापित करके मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूप की पूजा करने का विधान है। कलश की स्थापना के बारे में शास्त्रों में कहा गया कि इसे शुभ मुहूर्त में करना चाहिए।
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शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय के बाद की 10 घड़ी तक या दोपहर में अभिजित मुहूर्त के समय चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में कलश की स्थापना करना चाहिए। वहीं जब विहितकाल में प्रतिपदा तिथि की पहली 16 घड़िया और चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग का जब संपर्क हो तब कलश की स्थापना के लिए शुभ समय नहीं होता है।
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नवरात्र विशेष
ये हैं घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
सुबह 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट फिर इसके बाद सुबह 08:10 से दोपहर 12: 35 मिनट तक
दोपहर 12:07 से 12:35 तक (अभिजित मुहूर्त)
दोपहर 2:10 से 3:30 तक
कलश स्थापना के बाद, गणेश भगवान और माता दुर्गा जी की आरती से, नौ दिनों का व्रत प्रारंभ किया जाता है। नवरात्रि के पहले पहली देवी, माँ दुर्गा के शैलपुत्री रूप की आराधना की जाती है।