फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pradosh vrat 2021: इस बार है भौम प्रदोष व्रत, जानिए तिथि, महत्व और पूजन विधि

Thu, 11 Nov 2021 08:04 AM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 4
pradosh vrat 2021 in November
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस तरह से प्रत्येक माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं। यह तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है। हर प्रदोष व्रत का नाम सप्ताह के वार के अनुसार होता है और इसके फल की प्राप्ति भी उसी के अनुसार, बढ़ जाती है। इस बार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत 16 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन मंगलवार होने के कारण ये भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा। प्रत्येक प्रदोष पर व्रत और पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और वे अपने भक्तों के समस्त संकटों को दूर कर देते हैं। जानिए भौम प्रदोष व्रत का महत्व पूजन का समय व पूजा विधि।
 
विज्ञापन

2 of 4
pradosh vrat
प्रदोष व्रत का महत्व-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति नियम और निष्ठा से प्रत्येक प्रदोष का व्रत रखता है उसके कष्टों का नाश होता है। मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को करने से हनुमान जी की कृपा भी प्राप्त होती है वह आपका मंगल भी मजबूत होता है। इस व्रत को करने भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और आपके परिवार में सुख-शांति व समृद्धि आती है।
विज्ञापन

3 of 4
प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
भौम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त-
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष तिथि आरंभ- 16 नवंबर 2021 प्रातः 10 बजकर 31 मिनट से 
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष तिथि समाप्त- 17 नवंबर 2021 दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर
पूजन शुभ मुहूर्त- शाम 6 बजकर 55 मिनट से लेकर 8 बजकर 57 मिनट तक

प्रदोष व्रत का पूजन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय किया जाता है।
 
विज्ञापन

4 of 4
प्रदोष व्रत पूजन विधि-
प्रदोष व्रत पूजन विधि-
  • त्रयोदशी तिथि को प्रातः उठकर स्नानादि करके दीपक प्रज्वलित करके व्रत का संकल्प लेते हैं।
  • पूरे दिन व्रत करने के बाद प्रदोष काल में किसी मंदिर में जाकर पूजन करना चाहिए।
  • यदि मंदिर नहीं जा सकते तो घर के पूजा स्थल या स्वच्छ स्थान पर शिवलिंग स्थापित करके पूजन करना चाहिए
  • शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी व गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए।
  • धूप-दीप फल-फूल, नैवेद्य आदि से विधिवत् पूजन करना चाहिए।
  • पूजन और अभिषेक के दौरान शिव जी के पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का जाप करते रहें।
 
 
 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें