राजस्थान में लोहार्गल नाम का स्थान है और ऐसा कहा जाता है कि यहां पांडवों के शस्त्र गल गए थे। यह राजस्थान का पुष्कर के बाद दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही कुंड है जिसमें भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष की मत्स्य द्वादशी और चैत्र माह के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि पर इस जलाशय की विशेष तौर पर पूजा अर्चना की जाती है। इस स्थान का संबंध भगवान परशुराम, भगवान सूर्य और भगवान विष्णु से भी है।