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Pradosh Vrat 2023: बुध प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Wed, 27 Sep 2023 10:02 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Bhadrapad Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
Bhadrapad Pradosh Vrat 2023 Date: हर माह में दो त्रयोदशी तिथि पड़ती है। एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। दोनों ही पक्षों की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है और भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों का घर सुख-शांति व समृद्धि से भर देते हैं। साथ ही जो व्यक्ति नियम और निष्ठा से प्रत्येक प्रदोष का व्रत रखता है उसके कष्टों का नाश होता है। त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान भोले शंकर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में की गई भगवान शिव की पूजा कई गुना ज्यादा फलदायी होती है। इस समय भाद्रपद माह चल रहा है और इस माह का आखिरी प्रदोष व्रत आज यानी 27 सितंबर 2023 दिन बुधवार को है। ऐसे में चलिए जानते हैं भाद्रपद के आखिरी प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व...
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Bhadrapad Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
भाद्रपद बुध प्रदोष व्रत 2023 तिथि
पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 27 सितंबर 2023 को प्रात: 01 बजकर 45 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 27 सितंबर को ही रात 10 बजकर 18 मिनट पर होगा।
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Bhadrapad Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
बुध प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
इस दिन शिव पूजा के लिए उत्तम समय 27 सितंबर को शाम 06 बजकर 12 मिनट से रात 08 बजकर 36 मिनट तक है।

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Bhadrapad Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि
बुध प्रदोष व्रत वाले दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहन लें। इसके बाद शिव जी को याद करके व्रत एवं पूजा का संकल्प लें। फिर शाम के शुभ मुहूर्त में किसी शिव मंदिर जाकर या घर पर ही भगवान भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा करें।
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Bhadrapad Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
पूजा के दौरान शिवलिंग को गंगाजल और गाय के दूध से स्नान कराएं। उसके बाद सफेद चंदन का लेप लगाएं। महादेव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी का पत्ता, सफेद फूल, शहद, भस्म, शक्कर आदि अर्पित करें। इस दौरान ''ओम नमः शिवाय'' मंत्र का उच्चारण करते रहें।
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Bhadrapad Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और बुध प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें। फिर घी का दीपक जलाएं और शिव जी की आरती करें। इसके बाद पूजा का समापन क्षमा प्रार्थना से करते हुए शिवजी के सामने अपनी मनोकामना व्यक्त कर दें। इसके अगले दिन सुबह स्नान आदि के बाद फिर से शिव जी की पूजा करें। फिर सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। 
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