इसी से मिलता-जुलता एक प्रयोग लंदन के माडस्लो अस्पताल तथा इंस्टीट्यूट ऑफ साइकिएट्री के डॉ. पीटर फेन्विक ने भी किया। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘मेडिटेशन एंड साइंस’ में लिखा है कि उन्होंने ऐसे कुछ व्यक्तियों के मस्तिष्क की विद्युत क्रिया की जांच की जो कम से कम एक वर्ष से ध्यान का नियमित अभ्यास कर रहे थे। मस्तिष्क तरंगों की रिकॉर्डिंग में ध्यान के समय स्पष्ट परिवर्तन नोट किए गए। इन तरंगों से जो ताजगी मिलती है, उससे शरीर और मन बाहरी प्रतिकूलताओं को सहने लायक पर्याप्त सामर्थ्य जुटा लेता है।