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Baisakhi 2026: 13 या 14 अप्रैल कब है बैसाखी? जानें सही तारीख, पूजा का महत्व और खास बातें

Mon, 06 Apr 2026 07:18 AM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

 हिंदू सूर्य पंचांग के अनुसार बैसाखी को सिख नववर्ष के उत्सव का दिन माना जाता है। इस अवसर पर लोग भ्रम की स्थिति में हैं कि इस वर्ष बैसाखी 13 अप्रैल को पड़ेगी या 14 अप्रैल को। आइए जानते हैं विस्तार से। 
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बैसाखी 2026 - फोटो : amar ujala
Baisakhi 2026: बैसाखी को फसल का त्योहार माना जाता है। इसे विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा राज्यों में मनाया जाता है। यह त्योहार रबी की फसल के मौसम की खुशियों को आपस में बांटने के लिए मनाया जाता है। बैसाखी को 'वैसाखी' के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से सिख समुदाय के लोगों द्वारा बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदू सूर्य पंचांग के अनुसार बैसाखी को सिख नववर्ष के उत्सव का दिन माना जाता है। इस अवसर पर लोग भ्रम की स्थिति में है कि इस वर्ष बैसाखी 13 अप्रैल को पड़ेगी या 14 अप्रैल को। आइए जानते हैं विस्तार से। 
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हर साल लगभग 13 या 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। - फोटो : Amar Ujala
बैसाखी  कब है?
बैसाखी का त्योहार नए सौर वर्ष की शुभ शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। हर साल लगभग 13 या 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। इसे मेष संक्रांति कहा जाता है और यह दिन नए सौर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक होता है। इसी अवसर पर बैसाखी का त्योहार मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष बैसाखी का त्योहार 14 अप्रैल,2026 को मनाया जाएगा। 14 अप्रैल को सूर्य प्रातः  9:38 बजे मेष राशि में प्रवेश करेगा।
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बैसाखी को फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। - फोटो : freepik
बैसाखी का महत्व
बैसाखी सिख समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत गहरा है। इस दिन को सिख नव वर्ष या पंजाबी नव वर्ष की शुरुआत माना जाता है। बैसाखी को फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन आने वाले वर्ष के लिए नए मौसम, नई शुरुआत, नई उम्मीदों, नए लक्ष्यों और नई योजनाओं का प्रतीक है। लोग अच्छी फसल और जीवन में समृद्धि देने के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। वे लापरवाही या असावधानी के कारण हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा भी मांगते हैं और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
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यह दिन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामुदायिक उत्सव का एक सुंदर संगम है। - फोटो : freepik
बैसाखी की परम्पराएं 
बैसाखी के अवसर पर गुरुद्वारे विशेष कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन करते हैं जिससे पूरा समुदाय एक साथ आता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, दोस्तों और परिवार वालों से मिलते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। यह त्योहार विशेष रूप से पंजाब में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां भांगड़ा और गिद्दा जैसे पारंपरिक नृत्यों से पूरा माहौल ऊर्जा और उमंग से भर जाता है। पंजाब में कई क्षेत्रों में मेले भी लगते हैं, जहां लोग मिलकर इस त्योहार का जश्न मनाते हैं। इसके अलावा विभिन्न गुरुद्वारों में अमृत संचार समारोह भी आयोजित किए जाते हैं जो लोगों के सिख धर्म में दीक्षा लेने का प्रतीक होते हैं। यह दिन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामुदायिक उत्सव का एक सुंदर संगम है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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