वैशाख हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में पूर्णिमा तिथि पर विशाखा नक्षत्र होता है जिस वजह से इस माह को वैशाख का महीना कहा जाता है। गुरुवार ,9 अप्रैल से इस महीने की शुरुआत हो गई है और 7 मई, गुरुवार तक वैैशाख का पावन माह रहेगा।
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वैशाख माह का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में इस बात का वर्णन है कि वैशाख का यह महीना पुण्य देने वाला है। वैशाख माह का महत्व महाभारत, स्कंद पुराण और पद्म पुराण एवं निर्णय सिंधु ग्रंथ में बताया गया है। इन धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि वैशाख का महीना भगवान विष्णु को प्रिय है।
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सूर्योदय से पहले नहाने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैैशाख के इस पावन माह में सूर्योदय से पहले नहाने का बहुत अधिक महत्व होता है। सूर्योदय से पहले स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
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तीर्थ या गंगा स्नान करने का महत्व
वैशाख के पावन माह में तीर्थ या गंगा स्नान करने का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस माह में तीर्थ या गंगा स्नान करने से भगवान विष्णु का आशिर्वाद मिलता है। परंतु इस समय कोराना के कारण बाहर निकलने की मनाही है, जिस वजह से तीर्थ या गंगा स्नान करना संभव नहीं है। आइए, आज हम आपको बताते हैं आपको घर में रहकर कैसे तीर्थ या गंगा स्नान का लाभ मिल सकता है।
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स्नान वाले जल में मिलाएं गंगा जल
आप घर में ही अपने स्नान करने वाले जल में थोड़ा गंगाजल मिला लें। ऐसा करने के बाद पवित्र तीर्थों और नदियों का ध्यान करते हुए स्नान कर लें।
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गंगा जल से स्नान के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसाार इस माह में गंगा जल से स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है।
वैशाख के माह में दान पुण्य करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है। इस माह अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान- पुण्य का फल तीर्थ दर्शन के बराबर ही मिलता है।