Bageshwar Dham Sarkar: आजकल बागेश्वर धाम सरकार के आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री बहुत चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर भी काफी दिनों से बागेश्वर धाम सरकार के बारे में बहुत सी बातें कहीं जा रही है। जो लोग बागेश्वर धाम सरकार के बारे में नहीं जानते हैं उन्हें बता दें कि बागेश्वर धाम सरकार मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। इस दरबार में लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी अर्जी लेकर पहुंचते हैं। धीरेंद्र शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध हो चुके हैं। धीरेंद्र शास्त्री को लेकर कहा जाता है कि वह लोगों के मन की बात जान लेते हैं और दरबार में ये लोगों की परेशानी उनके बताने से पहले एक कागज में लिख देते हैं और उसके उपरांत लोगों से उसके बारे में पूछते हैं। बागेश्वर धाम सरकार को लेकर महाराष्ट्र की एक समिति ने उनकी शक्तियों को लेकर चुनौती दी थी। बागेश्वर धाम सरकार पर लोग अपनी परेशानियां और प्रेत बाधा दूर करने के उपाय के लिए जाते हैं। बागेश्वर धाम सरकार ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश में ही स्थित पंडोखर सरकार धाम और कानपुर स्थित करौली सरकार भी ऐसे ही चमत्कारों के लिए जाना जाता है। भूत प्रेत बाधा आखिर है क्या? आइए जानते हैं भूत प्रेत की धारणा को लेकर गरुड़ पुराण क्या कहता है।
क्या कहता है गरुड़ पुराण ?
- गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसा नहीं जिन लोगों की मृत्यु होती है वो सभी भूत प्रेत की योनि में चले जाते हैं। गरुड़ पुराण के के अनुसार जो व्यक्ति भूखे-प्यासे, राग, क्रोध, द्वेष, लोभ या वासना आदि की इच्छाएं लिए हुए काल कवलित हो जाता है या फिर दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या आदि से उसकी मृत्यु होती है वह प्रेत या भूत योनि में जाता है।
- गरुड़ पुराण के अनुसार जब आत्मा का वास भौतिक शरीर में होता है तब वह जे कहलात है लेकिन जैसे ही आत्मा शरीर त्याग देती है तो वह सूक्ष्म रूप धारण कर लेती है तो इसे सूक्ष्मात्मा कहते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसर भूत-प्रेतों की शक्तियां अपार होती हैं और इन्हें भूत, प्रेत, राक्षस, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल आदि के रूप में जाने जाते हैं।
- गरुड़ पुराण के अनुसार 84 लाख योनियां मानी जाती है। इन योनियों में कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, वृक्ष और मानव आदि सम्मिलित हैं। इन योनियों की जीवात्माएं मरने के बाद अदृश्य प्रेत योनि में चली जाती हैं। लेकिन प्रेत योनि की सभी आत्माएं बलवान नहीं होतीं। पुराण के अनुसार आत्मा का शक्तिशाली होना उसके जीवन के कर्म पर निर्भर करता है।
- गरुड़ पुराण के अनुसार पितरों का श्राद्ध कर उनकी आत्मा को शांति प्रदान की जाती है। गरुड़ पुराण की मानें तो जो आत्माएं अतृप्त होकर मरती हैं, इसलिए इन्हें शांत और तृप्त करने के लिए शास्त्रों में तर्पण और श्राद्ध के नियम हैं। यदि श्राद्ध और तर्पण के जरिए आत्माओं को संतुष्ट न किया जाए तो यह आत्माएं मृत्यलोक में ही विचरण करती हैं और लोगों को परेशान करती हैं।