15 फरवरी को साल का दूसरा ग्रहण है। इसके पहले 31 जनवरी को चन्द्रग्रहण था। शास्त्रों में ग्रहण को बहुत महत्व दिया जाता है और खान-पान पर विशेष सावधानी बरती जाती है। आखिर इसके पीछे क्या कारण है आइए जानते हैं।
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शास्त्रों के अनुसार ग्रहण पर भोजन करने से 12 वर्षों का एकत्र किया गया पुण्य नष्ट हो जाता है। इसलिए भूलकर भी ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए।
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ग्रहण के दौरान व्यक्ति को सोना नहीं चाहिए ऐसा करने से व्यक्ति की सेहत बिगड़ सकती है। ग्रहण के समय भगवान का ध्यान करते रहना चाहिए।
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शास्त्रों में कहा गया है कि जब ग्रहण पड़ रहा हो तो उस दौरान मल-मूत्र का त्याग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है।
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सूर्य ग्रहण
ग्रहण के समय किसी से बुरी बात या फिर धोखा नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से अगले जन्म में सर्प योनि में जन्म होता है।